Ramesh Mhatre Bail Cancelled: बॉम्बे HC का बड़ा फैसला, शिवसेना कॉर्पोरेटर को सरेंडर करने का आदेश

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AuthorAditya Rao|Published at:
Ramesh Mhatre Bail Cancelled: बॉम्बे HC का बड़ा फैसला, शिवसेना कॉर्पोरेटर को सरेंडर करने का आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की ज़मानत रद्द कर दी है। म्हात्रे पर शास्त्री नगर अस्पताल में मेडिकल स्टाफ पर हमले का आरोप है। कोर्ट ने उन्हें 19 जुलाई तक सरेंडर करने को कहा है, जिसका मुख्य कारण उनका लंबा आपराधिक इतिहास बताया गया है। यह फैसला महाराष्ट्र में डॉक्टरों की नियोजित हड़ताल से ठीक पहले आया है।

म्हात्रे और 4 अन्य की ज़मानत रद्द

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे और इस मामले में शामिल चार अन्य व्यक्तियों की ज़मानत रद्द कर दी है। यह मामला डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल का है, जहाँ कथित तौर पर मेडिकल स्टाफ पर हमला किया गया था।

निचली अदालत के फैसले पर सवाल

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने शनिवार को इस मामले की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने निचली मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले की समीक्षा की, जिसमें म्हात्रे को ज़मानत दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि ज़मानत देते समय म्हात्रे के पिछले कानूनी रिकॉर्ड को ठीक से ध्यान में नहीं रखा गया था।

18 क्रिमिनल केस का इतिहास

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि रमेश म्हात्रे का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। उन पर हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों सहित कुल 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, 17 मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया है, लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि इतने बड़े अपराधों में शामिल होने का उनका इतिहास ज़मानत के फैसले को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक था।

19 जुलाई तक सरेंडर का आदेश

इस फैसले के अनुसार, म्हात्रे को 19 जुलाई की शाम 5 बजे तक पुलिस के सामने सरेंडर करना होगा। अगर वे समय सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो कोर्ट ने अधिकारियों को उनकी अचल संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होनी है।

डॉक्टरों की हड़ताल पर असर

यह कानूनी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र का स्वास्थ्य क्षेत्र तनाव में है। राज्य भर के मेडिकल पेशेवरों ने अस्पताल में अपने सहकर्मियों पर हुए हमले के विरोध में 22 जुलाई को हड़ताल बुलाई है। हाई कोर्ट ने जहाँ आरोपियों के कानूनी दर्जे को संबोधित किया, वहीं मेडिकल समुदाय से अपील की है कि वे अपनी नियोजित हड़ताल पर पुनर्विचार करें, क्योंकि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की देखभाल पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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