बेंगलुरु में एक ट्रिपल मर्डर केस सामने आया है, जिसमें पुलिस को शक है कि आरोपी ने 6 महीने तक AI चैटबॉट की मदद से क्राइम की प्लानिंग की। जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि कैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल लाश ठिकाने लगाने के तरीकों को खोजने में हुआ।
Detailed Coverage
AI की मदद से रची गई खूनी साजिश?
बेंगलुरु के KR Puram इलाके में हुई एक ट्रिपल मर्डर की वारदात ने टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में 25 साल के केनेथ और उसकी पार्टनर श्वेथा को गिरफ्तार किया है। इन पर श्वेथा के माता-पिता और छोटी बहन की हत्या का आरोप है। यह घटना जून 2026 की बताई जा रही है और अब इस बात की जांच हो रही है कि क्या AI चैटबॉट ने इस खूनी खेल की प्लानिंग में आरोपी की मदद की।
₹50 लाख का कर्जा और बिजनेस का फेल होना
शुरुआती जांच में पता चला है कि हत्या के पीछे की वजह एक फेल हुए फाइनेंशियल अरेंजमेंट से जुड़ी हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्वेथा ने केनेथ के क्लाउड किचन बिजनेस के लिए अपने माता-पिता से करीब ₹50 लाख उधार लिए थे। जैसे-जैसे बिजनेस मुश्किलों में घिरता गया और उधार चुकाने का दबाव बढ़ा, आरोपी और पीड़ित परिवार के बीच तनाव बढ़ने लगा। माना जा रहा है कि आरोपी परिवार को अपनी फाइनेंशियल प्रॉब्लम के आड़े आ रहा था।
6 महीने तक AI से ली सलाह!
इस केस को जो चीज अलग बनाती है, वो है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कथित इस्तेमाल। इन्वेस्टिगेटर्स का कहना है कि आरोपी ने करीब 6 महीने तक एक AI चैटबॉट से बात की। उसने सवालों को इस तरह फ्रेम किया कि AI के सेफ्टी फिल्टर बायपास हो जाएं। आरोप है कि आरोपी ने क्राइम करने के तरीके, सबूत मिटाने और लाशों को ठिकाने लगाने की प्लानिंग पर AI से सलाह ली। एक प्लान तो यह भी था कि क्लाउड किचन के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्नेस का इस्तेमाल किया जाए, लेकिन AI से फीडबैक मिलने के बाद उसने यह प्लान छोड़ दिया।
अब कानूनी और डिजिटल कार्रवाई
इस केस को मजबूत बनाने के लिए बेंगलुरु पुलिस गूगल के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि आरोपी का चैट हिस्ट्री एक्सेस किया जा सके। इस डिजिटल एविडेंस से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि AI ने इन सवालों पर क्या जवाब दिए और क्या उसकी सलाह ने सीधे तौर पर क्राइम को अंजाम देने में भूमिका निभाई। यह मामला कानून एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है, क्योंकि अब उन्हें यह जांचना होगा कि क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी में डिजिटल टूल्स की कितनी जवाबदेही है। पुलिस फिलहाल डिजिटल रिकॉर्ड्स और पीड़ित के आखिरी बयान पर फोकस कर रही है।
