कोर्ट की राय और प्रत्यर्पण के आधार
यह फैसला ₹13,000 करोड़ के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की दिशा में एक अहम कदम है। एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील ने 3 अप्रैल को यह सलाह जारी की। कोर्ट ने पाया कि चोकसी पर लगे ज्यादातर आरोप भारत और बेल्जियम दोनों देशों में अपराध माने जाते हैं। 'दोहरी आपराधिकता' (dual criminality) के सिद्धांत के तहत, आपराधिक साजिश, विश्वासघात, जालसाजी और अवैध लाभ प्राप्त करने जैसे आरोप बेल्जियम के कानून के तहत भी अपराध हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी है। भारत ने 27 अगस्त 2024 को मुंबई कोर्ट के वारंट के आधार पर प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध किया था।
एक आरोप पर मिली छूट, अंतिम फैसला बाकी
हालांकि, कोर्ट ने 'सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने' के एक आरोप पर प्रत्यर्पण की सिफारिश नहीं की, क्योंकि यह बेल्जियम के कानून में फिलहाल अपराध नहीं है। कोर्ट ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि चोकसी को भारत में अनुचित व्यवहार या अन्यायपूर्ण मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। भारत सरकार ने उसकी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के बारे में पर्याप्त गारंटी दी है, जिसमें मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में उसकी संभावित हिरासत का विवरण भी शामिल है।
कानूनी राह में अभी भी चुनौतियां
कोर्ट की इस सकारात्मक सलाह के बावजूद, मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की राह में अभी भी कुछ जटिलताएं और संभावित देरी बाकी है। साक्ष्य मिटाने के आरोप को भले ही बेल्जियम के कानून के तहत खारिज किया गया हो, लेकिन यह प्रत्यर्पण का हिस्सा नहीं बनेगा। बेल्जियम सरकार को अभी अंतिम फैसला लेना है, और चोकसी के पास कोर्ट के फैसले को बेल्जियम के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प भी है, जिससे कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच सकती है। यह मामला भारत के आर्थिक भगोड़ों को वापस लाने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध पर असर
अगर मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय अपराधों से लड़ने और भगोड़ों को जवाबदेह ठहराने के भारत के प्रयासों के लिए एक बड़ी जीत होगी। यह मामला सीमा पार बड़े वित्तीय घोटालों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संधियों के महत्व को रेखांकित करता है।