BSES Power Assets Frozen: दिल्ली की बिजली सप्लाई पर खतरा? ED ने RCOM केस में ₹1,575 करोड़ फ्रीज किए

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
BSES Power Assets Frozen: दिल्ली की बिजली सप्लाई पर खतरा? ED ने RCOM केस में ₹1,575 करोड़ फ्रीज किए
Overview

Reliance Communications (RCOM) से जुड़ी जांच के तहत, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने BSES बिजली वितरण कंपनियों की **₹1,575 करोड़** की संपत्ति फ्रीज कर दी है। इस कार्रवाई से दिल्ली की बिजली सप्लाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने Reliance Communications (RCOM) से जुड़े एक बड़े मामले की जांच के तहत, दिल्ली की बिजली सप्लाई करने वाली BSES राजdhani Power Limited (BRPL) और BSES Yamuna Power Limited (BYPL) की ₹1,575 करोड़ की संपत्ति फ्रीज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही इस जांच में RCOM पर ₹27,300 करोड़ से अधिक के फंड के दुरुपयोग का आरोप है।

ED की बड़ी कार्रवाई: ₹1,575 करोड़ की BSES संपत्ति फ्रीज

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) की जांच पर सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि RCOM से जुड़े ₹27,300 करोड़ के फंड के कथित दुरुपयोग मामले में ED ने BRPL और BYPL के ₹1,575 करोड़ के शेयरों को प्रोविजनल तौर पर जब्त कर लिया है। अनिल अंबानी के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि 'शायद उन्हें धोखा दिया गया था'। सीबीआई ने बताया कि जांच जारी है और दो गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। अनिल अंबानी की टीम का तर्क है कि इन कंपनियों को सिर्फ ग्रुप से जुड़े होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है, और इस फ्रीज से आवश्यक ऑपरेटिंग फंड्स सीमित हो जाएंगे, जिससे बिजली की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

कानूनी अड़चनों के बावजूद BSES कंपनियों का मजबूत ऑपरेशन

कानूनी चुनौतियों के बावजूद, BRPL और BYPL अपना कामकाज मजबूती से कर रही हैं। BRPL ने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹14,300 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि AT&C लॉस 6.12% रहा। वहीं, BYPL ने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹7,750 करोड़ का रेवेन्यू और 6.02% का AT&C लॉस दर्ज किया। दोनों कंपनियों के पास बड़ा रेगुलेटरी एसेट्स (RA) हैं: BRPL के पास FYE25 तक ₹18,030 करोड़ (INR180.3 बिलियन) और BYPL के पास मार्च 2025 तक ₹11,738 करोड़ हैं। Reliance Infrastructure Ltd. (RInfra), जो दोनों BSES इकाइयों में 51% हिस्सेदारी रखती है, वह भी इन ग्रुप जांचों में शामिल है। RInfra का स्टॉक 4 मई 2026 तक 0.48 के लो P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा था। RCOM खुद 2019 से कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी में है, और इसके लोन को एसबीआई (SBI) ने धोखाधड़ी करार दिया है।

ग्रुप की वित्तीय मुश्किलें और पावर यूटिलिटीज के लिए चिंता

सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई अनिल अंबानी ग्रुप की व्यापक वित्तीय मुश्किलों का हिस्सा है। ED द्वारा BSES एसेट्स की यह सीज़, हालांकि प्रोविजनल है, लेकिन इन आवश्यक यूटिलिटी प्रोवाइडर्स के संचालन और वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा करती है। यह कार्रवाई ग्रुप की ₹10,117 करोड़ से अधिक की कुल संपत्तियों की सीज़ का हिस्सा है। RCOM पर ₹40,185 करोड़ से अधिक के लोन धोखाधड़ी का आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रुप ने 2006 से ₹41,921 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी की है। अनिल अंबानी ने 2020 में यूके कोर्ट में पर्सनल बैंकक्रप्सी घोषित की थी। ग्रुप ने 2019 से 2025 के बीच ₹73,250 करोड़ से अधिक की संपत्ति बेची है, लेकिन जारी जांचें लंबी कानूनी लड़ाई का संकेत देती हैं। यदि RInfra की BRPL और BYPL में हिस्सेदारी की सीज़ फाइनल हो जाती है, तो यह उनके कैश फ्लो को गंभीर रूप से सीमित कर सकती है।

BSES पावर के लिए अनिश्चित भविष्य

BSES इकाइयों का भविष्य ED जांचों के नतीजों और ग्रुप के कानूनी रवैये पर बहुत हद तक निर्भर करेगा। CARE Ratings ने इन ED कार्रवाइयों के कारण BRPL और BYPL को 'नेगेटिव' रेटिंग वॉच पर रखा है। निवेशक का भरोसा कम है, और ग्रुप कंपनियों पर यह जांच नए निवेश को हतोत्साहित कर सकती है। इन कानूनी मुद्दों को सुलझाना और फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी कराना उनकी भविष्य की वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.