ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने मैसेजिंग ऐप Telegram के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि कंपनी ने अपनी नीतियों का पालन नहीं किया और प्लेटफॉर्म से आतंकी (terrorist) कंटेंट को हटाने में नाकाम रही। इस मामले में Telegram पर **54.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर** तक का जुर्माना लग सकता है।
टेररिस्ट कंटेंट हटाने में नाकाम?
ऑस्ट्रेलिया के रेगुलेटर, ई-सेफ्टी कमिश्नर का कहना है कि Telegram ने स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया है। कमिश्नर के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो उपलब्ध थे जिनमें आतंकी हमलों और सामूहिक गोलीबारी को दिखाया गया था। इनमें क्राइस्टचर्च और बफ़ेलो हमलों से जुड़ा कंटेंट भी शामिल था, जिसे चेतावनी के बावजूद हटाया नहीं गया।
भारी जुर्माना
ऑस्ट्रेलियाई कानून के तहत, अगर कोर्ट यह पाता है कि Telegram ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है, तो कंपनी पर 54.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर (लगभग 38 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। ई-सेफ्टी कमिश्नर के ऑफिस की जांच में यह बात सामने आई है कि जुलाई से अक्टूबर 2025 के बीच ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स ने कई बार ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट की रिपोर्ट की थी। कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, Telegram ने इन फ्लैग किए गए पोस्ट्स को हटाने या संबंधित अकाउंट्स के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई।
Telegram का रुख
दूसरी ओर, Telegram ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि वे इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और कोर्ट में इसका बचाव करेंगे। Telegram के स्पोक्सपर्सन ने बताया कि वे एंटी-टेररिज्म मॉडरेशन के लिए बड़े पैमाने पर काम करते हैं और 2026 की पहली छमाही में ही उन्होंने हजारों एक्सट्रीमिस्ट कम्युनिटीज को ब्लॉक किया था।
रेगुलेटरी चिंताएं
दुबई स्थित Telegram, 1 बिलियन से ज्यादा मंथली एक्टिव यूजर्स वाला एक ग्लोबल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है। हालांकि, यह यूक्रेन जैसे बड़े वैश्विक संकटों के दौरान जानकारी का एक अहम स्रोत भी रहा है, लेकिन इसके एन्क्रिप्शन फीचर्स और कंटेंट मॉडरेशन के तरीके अक्सर दुनियाभर के रेगुलेटर्स के निशाने पर रहे हैं।
आगे क्या?
यह केस निवेशकों और बाजार पर नजर रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। अब यह देखना होगा कि इस कानूनी लड़ाई का नतीजा क्या निकलता है और क्या इससे ऑस्ट्रेलिया में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए कोई नए रेगुलेटरी नियम बनते हैं। यह मामला टेक्नोलॉजी कंपनियों पर यूजर प्राइवेसी और कंटेंट कंप्लायंस के बीच संतुलन बनाने के बढ़ते दबाव को दर्शाता है। कोर्ट की अगली सुनवाई और Telegram के मॉडरेशन सिस्टम पर आने वाले फैसले पर सभी की नजरें रहेंगी।
