गर्भावस्था अब सरकारी नौकरी में बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
गर्भावस्था अब सरकारी नौकरी में बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि गर्भावस्था के कारण किसी महिला को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में शारीरिक दक्षता परीक्षा (physical efficiency test) को स्थगित करने की अनुमति दी है।

सरकारी नौकरी में महिलाओं को बड़ी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य किसी महिला को उसकी गर्भावस्था के आधार पर सरकारी नौकरी देने से इनकार नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि महिला को करियर और मातृत्व के बीच चयन के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

शारीरिक परीक्षा स्थगित करने का आदेश

यह मामला तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन कमीशन (UPSSSC) ने एक उम्मीदवार, कोमल जैसवाल, को वन रक्षक (Forest Guard) और वन्यजीव रक्षक (Wildlife Guard) पदों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा स्थगित करने की अर्जी ठुकरा दी थी। आयोग का कहना था कि भर्ती नियमों में गर्भावस्था के दौरान ऐसी छूट का कोई प्रावधान नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने इस पर गौर किया कि भर्ती प्रक्रियाएं अक्सर लंबी चलती हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि विवाह या गर्भावस्था जैसी प्राकृतिक जीवन घटनाओं के लिए महिलाओं को दंडित करना समानता और निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने UPSSSC को चार सप्ताह के भीतर उम्मीदवार की शारीरिक परीक्षा कराने का निर्देश दिया। साथ ही, यह भी आदेश दिया कि यदि उम्मीदवार सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करती है, तो OBC महिला श्रेणी में एक सीट खाली रखी जाए ताकि उसकी नियुक्ति सुनिश्चित हो सके और उसे सभी लाभ मिलें।

सरकारी भर्ती नीतियों पर प्रभाव

इस न्यायिक हस्तक्षेप से यह संकेत मिलता है कि सरकारी भर्ती निकायों को अपनी मौजूदा नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। कई सरकारी नौकरियों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा अनिवार्य होती है, और सख्त नियम अनजाने में महिलाओं के लिए बाधाएं पैदा कर सकते हैं। कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक नियमों को लैंगिक भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा के अनुरूप विकसित होना चाहिए।

आने वाले समय में, नौकरी चाहने वालों और प्रशासनिक निकायों दोनों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि UPSSSC और अन्य सरकारी भर्ती आयोग गर्भवती उम्मीदवारों के लिए अधिक लचीली परीक्षण अनुसूची को शामिल करने के लिए अपनी अधिसूचना दिशानिर्देशों को कैसे संशोधित करते हैं। इस फैसले से पूरे भारत में भविष्य की राज्य-स्तरीय भर्ती अभियानों में अधिक समावेशी भर्ती प्रथाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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