Akzo Nobel India Share Price: टैक्स का बड़ा झटका! **₹111 करोड़** की मांग से कंपनी की रिकवरी पर सवाल?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Akzo Nobel India Share Price: टैक्स का बड़ा झटका! **₹111 करोड़** की मांग से कंपनी की रिकवरी पर सवाल?
Overview

Akzo Nobel India को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी को **2023-24** के असेसमेंट ईयर के लिए **₹111.63 करोड़** का ड्राफ्ट इनकम टैक्स असेसमेंट ऑर्डर मिला है। इस बड़ी टैक्स डिमांड ने कंपनी की जारी रिकवरी की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।

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Akzo Nobel India के शेयर में 9 मार्च 2026 को 1.76% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट कंपनी द्वारा स्टॉक एक्सचेंज को दी गई एक अहम जानकारी के बाद आई। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2023-24 के असेसमेंट ईयर के लिए कंपनी की आय में ₹111.63 करोड़ की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जो मुख्य रूप से कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax) और ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing) से जुड़े नियमों से संबंधित है।

कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल एक ड्राफ्ट ऑर्डर (Draft Order) है और इसे लेकर वह अपनी दलीलें पेश कर सकती है तथा आगे अपील (Appeal) भी कर सकती है। फिलहाल, Akzo Nobel India इस मामले पर अपने टैक्स एडवाइजर्स (Tax Advisors) से सलाह ले रही है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके। इस डिमांड का अंतिम असर और भुगतना पड़ने वाली राशि अभी तय नहीं है, जो कि एक अनिश्चितता पैदा कर रहा है।

यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आया है जब कंपनी के मैनेजमेंट (Management) ने अपनी रिकवरी को लेकर काफी सकारात्मक संकेत दिए थे। CEO राजीव राजगोपाल ने बताया था कि बेहतर वॉल्यूम (Volume), रणनीतिक प्राइसिंग (Strategic Pricing), नए प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार के चलते कंपनी का बिजनेस इंडस्ट्री ग्रोथ के साथ तालमेल बिठा रहा है। कंपनी डेकोरेटिव पेंट्स (Decorative Paints) सेगमेंट में OEM पार्टनर्स (OEM Partners), आफ्टरमार्केट (Aftermarket) और मरीन व इंडस्ट्रियल कोटिंग्स (Marine and Industrial Coatings) में ग्रोथ की उम्मीद कर रही थी।

भारतीय पेंट्स और कोटिंग्स मार्केट (Paints and Coatings Market) में 9.28% की CAGR से ग्रोथ का अनुमान है, जिसके 2031 तक USD 19.5 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। Akzo Nobel India की फाइनेंसियल पोजीशन (Financial Position) भी काफी मजबूत दिखती है, जिसमें 32.2% का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और 41.7% का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) शामिल है। कंपनी लगभग डेट-फ्री (Debt-free) भी है। हालांकि, इसके P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 32.9 है, जो Asian Paints (57-59) और Berger Paints (45-52) जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी कम है।

यह पहली बार नहीं है कि Akzo Nobel India टैक्स विवादों में फंसी है। अगस्त 2025 में, ₹17.66 करोड़ की GST डिमांड को घटाकर ₹41.56 लाख कर दिया गया था, और एक पुरानी टैक्स डिमांड को रद्द भी कर दिया गया था। बार-बार इस तरह के टैक्स मुद्दे कंपनी के लिए लगातार अनिश्चितता और अनुपालन संबंधी बाधाएं (Compliance Friction) पैदा करते रहते हैं। ₹111 करोड़ की यह नई डिमांड पिछली चिंताओं से कहीं ज्यादा बड़ी हो सकती है, जो कैश फ्लो (Cash Flow) और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती है।

बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया, यानी शेयर में गिरावट, यह दर्शाती है कि ऐसे रेगुलेटरी हेडविंड्स (Regulatory Headwinds) कंपनी की रिकवरी की कहानी को आसानी से पटरी से उतार सकते हैं। पिछले एक साल में, Akzo Nobel India का शेयर 15.65% गिर चुका है। इन सबके बावजूद, मैनेजमेंट का अपनी रिकवरी की रणनीति पर विश्वास बना हुआ है। एनालिस्ट्स (Analysts) भी आम तौर पर पॉजिटिव (Positive) हैं और एक एनालिस्ट ने शेयर के लिए ₹3,662.82 का एक साल का टारगेट प्राइस (Target Price) तय किया है, जो मौजूदा स्तरों से अच्छी खासी तेजी का संकेत देता है। यह दर्शाता है कि बाजार इस टैक्स डेवलपमेंट को एक अस्थायी प्रक्रियागत मुद्दा मान सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.