Adani Group vs SEC: अमेरिकी कोर्ट में Adani Group की बड़ी चाल, कहा - 'हमारे मामले पर आपका अधिकार क्षेत्र नहीं'

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Adani Group vs SEC: अमेरिकी कोर्ट में Adani Group की बड़ी चाल, कहा - 'हमारे मामले पर आपका अधिकार क्षेत्र नहीं'
Overview

Adani Group के प्रमोटर गौतम और सागर अडानी, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के एक फ्रॉड केस को खारिज कराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि SEC के पास इस मामले में ज्यूरिस्डिक्शन (Jurisdiction) यानी अधिकार क्षेत्र नहीं है और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत भी नहीं हैं।

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SEC के अधिकार क्षेत्र पर सवाल?

Adani Group ने SEC द्वारा नवंबर 2024 में दायर किए गए फ्रॉड केस के खिलाफ एक जोरदार कानूनी पैंतरा चला है। समूह सिर्फ आरोपों का जवाब देने के बजाय SEC की मामले को आगे बढ़ाने की बुनियादी क्षमता पर ही सवाल उठा रहा है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सौदों को नियंत्रित करने में SEC की ताकत को चुनौती देता है और नवंबर 2024 के मुकदमे से होने वाले नुकसान को सीमित करने का लक्ष्य रखता है। इस लड़ाई का नतीजा भविष्य के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नियमों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।

ज्यूरिस्डिक्शन (Jurisdiction) को चुनौती

Adani के वकील मुख्य रूप से व्यक्तियों पर अमेरिकी अदालत के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं। उनका तर्क है कि गौतम और सागर अडानी के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बहुत कम प्रत्यक्ष संबंध हैं, जिस आधार पर SEC को अधिकार क्षेत्र मिल सके। बचाव पक्ष का मुख्य बिंदु यह है कि Adani Green Energy द्वारा सितंबर 2021 में की गई $750 मिलियन की बॉन्ड ऑफरिंग पूरी तरह से अमेरिका के बाहर, गैर-अमेरिकी अंडरराइटरों (Underwriters) का उपयोग करके हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए, वे कहते हैं कि SEC ने 'डोमेस्टिक ट्रांजेक्शन' (Domestic Transaction) का कोई सबूत नहीं दिखाया है, जो अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों (US securities laws) को लागू करने के लिए आवश्यक है। यह रुख बताता है कि SEC का मामला अनुचित रूप से अमेरिकी सीमाओं से परे पहुंच रहा है, क्योंकि कंपनी, बॉन्ड और कथित गलत काम, सब भारत में हुए थे।

सबूतों पर भी सवाल?

Adani SEC के आरोपों के मूल पर भी सवाल उठा रहा है। उनके फाइलिंग में कथित रिश्वतखोरी की योजना के ठोस सबूतों की कमी बताई गई है, जिसमें SEC का दावा है कि सौर ऊर्जा अनुबंधों के लिए भारतीय अधिकारियों को $250 मिलियन से अधिक का भुगतान किया गया था। बचाव पक्ष ने ESG लक्ष्यों और कंपनी की प्रतिष्ठा के बारे में बयानों को गैर-कार्रवाई योग्य 'पफरी' (Puffery) यानी मानक कॉर्पोरेट आशावाद बताया है, जिस पर निवेशकों को भरोसा नहीं करना चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि बचाव पक्ष का कहना है कि SEC ने ऐसा कोई दावा नहीं किया है, और न ही किसी निवेशक को कोई नुकसान हुआ है। संबंधित बॉन्ड 2024 में परिपक्व (mature) हो गए थे और ब्याज सहित पूरी तरह से चुकाए जा चुके थे।

बाजार में Adani Green की स्थिति

Adani Green Energy भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) बाजार में एक प्रमुख कंपनी है, जो 2030 तक 500 GW क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विस्तार कर रही है। हालांकि, Adani Green का मूल्यांकन काफी ज्यादा दिख रहा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 111x है, जो उद्योग के औसत 23-26x और प्रतिद्वंद्वियों जैसे NTPC (14.4x) और Power Grid Corporation (17.4x) से कहीं ऊपर है। विश्लेषकों की राय मिली-जुली है। एक आम सहमति रेटिंग 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) है, जिसमें 12 महीने का प्राइस टारगेट INR 1,194.13 है, जो संभावित बढ़त की ओर इशारा करता है। वहीं, MarketsMojo ने उच्च कर्ज (debt) और कमजोर मुनाफे के कारण 2026 की शुरुआत में 'स्ट्रॉन्ग सेल' (Strong Sell) की चेतावनी जारी की थी। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) उद्योग के औसत की तुलना में अधिक है, जो इसकी वित्तीय लचीलेपन पर सवाल उठाता है।

जोखिम: रेगुलेटरी दबाव और कर्ज

यदि SEC अधिकार क्षेत्र के लिए दबाव बनाना जारी रखता है, तो Adani Group को महत्वपूर्ण जोखिम का सामना करना पड़ सकता है, जो अमेरिकी नियामकों (regulators) के लिए विदेश में कार्रवाई करने का एक मजबूत मिसाल कायम कर सकता है। कंपनी का उच्च लीवरेज (leverage), जो उसके डेट-टू-इक्विटी रेशियो से पता चलता है, एक कमजोरी है, खासकर अगर मुनाफा गिरता है या इंटरेस्ट कॉस्ट (Interest Cost) बढ़ती है। Adani के शेयर अस्थिरता दिखाते रहे हैं, जिसमें 2025 की शुरुआत और फिर जनवरी 2026 में SEC की जांच की खबर के बाद तेज गिरावट आई थी। हालांकि गौतम अडानी ने 2024 के अंत में इन आरोपों पर बात की थी, जिससे एक संक्षिप्त तेजी आई थी, लेकिन चल रहा कानूनी फोकस चिंता का विषय बना हुआ है। रेटिंग एजेंसियां हालांकि कुछ Adani Green संस्थाओं के लिए 'Ba1/Stable' जैसी सतर्कतापूर्ण राय दिखाती हैं।

आगे का रास्ता

कानूनी लड़ाई के बावजूद, Adani Green Energy नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना और धन जुटाना जारी रखे हुए है। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और विशेष रूप से समर्थकों में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र समग्र रूप से और अधिक विकास के लिए तैयार है, जो सरकारी योजनाओं और स्वच्छ बिजली की मांग से प्रेरित है। हालांकि, SEC मामले का समाधान कैसे होता है, यह लंबी अवधि में निवेशकों के विश्वास और कंपनी की बिना कानूनी समस्याओं के वैश्विक फंडिंग तक पहुंचने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.