कोर्ट का बड़ा फैसला: विदेशी जांच पर टिकी अर्ज़ी खारिज
बॉम्बे हाई कोर्ट ने Adani Green Energy के खिलाफ़ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के मामले का आधार मुख्य रूप से अमरीकी अभियोगों (U.S. indictments) और SEC (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन) की कार्यवाही से मिली विदेशी जानकारी पर टिका था। कोर्ट के अनुसार, इस आधार पर घरेलू स्तर पर जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। इस फैसले से कंपनी को सौर ऊर्जा (solar power) के अनुबंधों को लेकर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों से बड़ी राहत मिली है। इन आरोपों में कथित तौर पर ₹2,000 करोड़ से अधिक की रिश्वतखोरी का जिक्र था, जिसका इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में बिजली खरीद समझौतों (power purchase agreements) को ऊंचे दामों पर हासिल करने के लिए किया गया था। Adani Green Energy का शेयर 26 मार्च 2026 को लगभग ₹853.80 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, और पिछले कुछ सालों में ऐसे कानूनी चुनौतियों के कारण इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया है।
आरोपों की परछाईं और कंपनी का पक्ष
हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन कंपनी पर लगे आरोपों की छाया अभी भी बनी हुई है। ये आरोप अमरीकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) के अभियोगों और SEC की नागरिक शिकायतों से सामने आए थे। Adani Green Energy ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि गौतम अडानी और सागर अडानी पर इन मामलों में अमरीकी विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (U.S. Foreign Corrupt Practices Act - FCPA) के तहत कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं। इसके बावजूद, SEC ने अमरीकी कानूनों के उल्लंघन को लेकर अलग से नागरिक मुकदमे दायर किए हैं। यह कानूनी स्थिति कंपनी के स्टॉक में पहले की अस्थिरता और रेटिंग एजेंसियों जैसे Fitch द्वारा Adani Group के बॉन्ड को 'नेगेटिव वॉच' पर रखने का कारण बनी थी।
सेक्टर में स्थिति और वैल्यूएशन
Adani Green Energy भारत के तेज़ी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का एक प्रमुख हिस्सा है। यह सेक्टर वैश्विक स्तर पर स्थापित क्षमता के मामले में चौथे स्थान पर है और इसमें महत्वपूर्ण विस्तार की उम्मीद है। 2026 की शुरुआत तक, भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 51% से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा का बड़ा योगदान है। हालांकि, कंपनी का वैल्यूएशन, खासकर इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो, इंडस्ट्री औसत से काफी ऊपर दिखाई देता है। मार्च 2026 में, Adani Green Energy का P/E रेशियो लगभग 93.13 था, जबकि भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री का औसत 25.4x है। यह ऊँचा P/E दिखाता है कि निवेशक कंपनी से भविष्य में भारी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। इसकी तुलना में, JSW Energy का P/E 44.63 और IREDA का 17.02 है।
विश्लेषकों की राय और भविष्य का नज़रिया
विश्लेषक आम तौर पर Adani Green Energy के भविष्य को लेकर आशावादी बने हुए हैं। 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की आम सहमति और ₹1,165.29 से ₹1,396.25 के बीच औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट (price targets) मौजूदा ट्रेडिंग कीमतों से संभावित अपसाइड का संकेत देते हैं। कंपनी को भारत की रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति, सरकारी नीतियों और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग का लाभ मिल रहा है। हालांकि, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे चल रहे कानूनी मुद्दों और कंपनी के ऊंचे वैल्यूएशन मेट्रिक्स पर सावधानी से विचार करें।