ज्यूरिसडिक्शन पर छिड़ी जंग, Adani का बड़ा दांव
Adani Group के बचाव पक्ष ने अब U.S. Securities and Exchange Commission (SEC) के खिलाफ अपने सिक्योरिटीज फ्रॉड (securities fraud) के मुकदमे में एक बड़ा कदम उठाया है। अब वे केवल प्रोसीजरल डिले (procedural delays) के बजाय ज्यूरिसडिक्शन (jurisdiction) यानी अधिकार क्षेत्र पर एक मुख्य कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। गौतम और सागर अडानी के वकील यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अमेरिकी जिला अदालत (U.S. District Court) का पूर्वी न्यूयॉर्क जिले में व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र (personal jurisdiction) है।
ऑफशोर बॉन्ड बिक्री पर SEC का अधिकार नहीं: Adani की दलील
उनका तर्क है कि Adani Green Energy Ltd द्वारा 2021 में की गई $750 मिलियन की बॉन्ड पेशकश, जो SEC के दावों का मुख्य आधार है, पूरी तरह से ऑफशोर (offshore) थी। उन्होंने बताया कि यह पेशकश Rule 144A और Regulation S जैसी छूटों का उपयोग करके की गई थी, जिसमें सिक्योरिटीज को गैर-अमेरिकी अंडरराइटरों को बेचा गया और फिर योग्य संस्थागत खरीदारों (qualified institutional buyers) को। Adani Green खुद इन बाद की बिक्री में शामिल नहीं थी। इस रणनीति का उद्देश्य यह दिखाना है कि कोई "डोमेस्टिक ट्रांजैक्शन" (domestic transaction) नहीं हुआ, जो अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों (U.S. securities laws) को लागू करने के लिए आवश्यक है। वे इसे अमेरिकी कानून का "अस्वीकार्य बाह्य अनुप्रयोग" (impermissible extraterritorial application of U.S. law) बता रहे हैं।
SEC के आरोप: क्या निवेशकों को गुमराह किया?
SEC का आरोप है कि गौतम और सागर अडानी ने निवेशकों को यह जानकारी नहीं दी कि Adani Green ने 2021 की बॉन्ड पेशकश में अमेरिकी निवेशकों से $175 मिलियन से अधिक जुटाए थे, जबकि वे भारतीय राज्य के अधिकारियों से जुड़े एक रिश्वतखोरी (bribery) की योजना का खुलासा करने में विफल रहे। नियामक का दावा है कि पेशकश सामग्री में Adani Green के भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों (anti-corruption efforts) के बारे में झूठे या भ्रामक बयान थे।
कानूनी प्रक्रिया और समय-सीमा
यदि उनके अधिकार क्षेत्र के तर्क विफल होते हैं, तो Adani को ऊर्जा अनुबंधों के लिए रिश्वतखोरी की साजिश रचने और अनुपालन को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के दावों का सामना करना पड़ सकता है। SEC इन मामलों में निषेधाज्ञा (injunctions), नागरिक दंड (civil penalties) और अधिकारी-और-निदेशक प्रतिबंध (officer-and-director bars) की मांग कर रहा है। दोनों पक्ष एक नई समय-सारणी के लिए सहमत हुए हैं। Adanis द्वारा खारिज करने की अर्जी 8 जून, 2026 तक, SEC का जवाब 7 अगस्त तक और Adanis की अंतिम दलील 21 सितंबर तक देय है। यदि न्यायाधीश निकोलस जी. गारॉफिस (Judge Nicholas G. Garaufis) द्वारा इसे मंजूरी दी जाती है, तो यह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का संकेत देता है।
Adani Enterprises के शेयर में मजबूती
इस कानूनी लड़ाई के बीच, Adani Group की फ्लैगशिप कंपनी Adani Enterprises Ltd (AEL) के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन दिखाया है। 17-18 अप्रैल, 2026 तक, AEL के शेयर लगभग ₹2,218 पर कारोबार कर रहे थे, और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग ₹2.88 लाख करोड़ था। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 20.42 था, जो उद्योग के P/E 47.6578 से काफी कम है। ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवसायों में ग्रोथ को देखते हुए स्टॉक पर "Buy" रेटिंग और ₹2,600 का प्राइस टारगेट (price target) बरकरार रखा है। यह ध्यान देने योग्य है कि बचाव पक्ष का यह तर्क कि किसी निवेशक को नुकसान नहीं हुआ और बॉन्ड का भुगतान कर दिया गया, disclosure violations के SEC दावों को ओवरराइड नहीं कर सकता है।