अडानी के बड़े एग्जीक्यूटिव्स ने SEC के केस पर खड़े किए सवाल
गौतम अडानी और सागर अडानी ने अमेरिकी SEC के धोखाधड़ी के एक बड़े मामले को खारिज करने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। उनके वकील का कहना है कि जिस अदालत में यह केस चल रहा है, उसे इस मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) नहीं है। वकीलों ने दलील दी है कि कथित तौर पर जो भी गलत काम हुआ, वह भारत में हुआ और इसमें अमेरिका के बाहर के लेनदेन शामिल थे।
SEC का यह मुकदमा सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) द्वारा जारी किए गए $750 मिलियन के बॉन्ड ऑफरिंग से जुड़ा है। इस ऑफरिंग के जरिए अमेरिकी निवेशकों से लगभग $175 मिलियन जुटाए गए थे। SEC का आरोप है कि एक रिश्वतखोरी की योजना भी थी।
हालांकि, अडानी ग्रुप के बचाव पक्ष का कहना है कि उनका अमेरिका से पर्याप्त जुड़ाव नहीं है और न ही बॉन्ड की बिक्री में उनकी सीधी भागीदारी थी, जिससे उन पर अमेरिकी ज्यूरिसडिक्शन लागू हो सके। वे रूल 144A और रेगुलेशन S के तहत मिली छूट का हवाला दे रहे हैं और कह रहे हैं कि लेनदेन अमेरिका के बाहर किए गए थे। उनके वकील अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 'Morrison v. National Australia Bank' फैसले का जिक्र कर रहे हैं, जिसके अनुसार SEC का मामला 'अस्वीकार्य रूप से विदेशी अधिकार क्षेत्र' के दायरे में आता है।
भारत का रिन्यूएबल सेक्टर और AGEL की स्थिति
अडानी ग्रीन एनर्जी भारत के तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में काम कर रही है। अनुमान है कि सरकारी नीतियों और पर्यावरण पर बढ़ते फोकस के कारण यह सेक्टर 2034 तक $52.58 बिलियन का हो सकता है। AGEL इस सेक्टर में एक बड़ा खिलाड़ी है। हालांकि, कंपनी का वैल्यूएशन (valuation) काफी ऊंचा है। अप्रैल 2026 की शुरुआत तक, इसका P/E रेश्यो 94.15 से 211.96 के बीच था, और मार्केट कैप लगभग ₹1.43-1.52 लाख करोड़ था। NTPC ग्रीन एनर्जी, JSW एनर्जी और टाटा पावर जैसी कंपनियाँ भी विस्तार कर रही हैं।
अडानी ग्रुप पहले भी अमेरिकी रेगुलेटरी जांच के दायरे में आ चुका है। हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद 2023 के मध्य में अमेरिकी अटॉर्नी ऑफिस और SEC ने पूछताछ की थी। हाल ही में, अडानी एंटरप्राइजेज पर अमेरिकी ट्रेजरी के OFAC ने संभावित ईरान लेनदेन को लेकर नागरिक समीक्षा (civil review) भी की थी।
अडानी का जवाब: बॉन्ड की पूरी हो चुकी है चुकौती
SEC की सिविल शिकायत के साथ-साथ आपराधिक आरोपों में यह भी कहा गया है कि गौतम और सागर अडानी ने अडानी ग्रीन और एज़्योर पावर को फायदा पहुंचाने के लिए करोड़ों डॉलर की रिश्वतखोरी की योजना बनाई थी। अडानी की दलील का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि SEC की शिकायत में किसी भी निवेशक के नुकसान का जिक्र नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि बॉन्ड की अवधि 2024 में पूरी हो गई थी और ब्याज सहित उनका पूरा भुगतान कर दिया गया था। वे सबूतों की कमी के कारण रिश्वतखोरी के आरोपों से इनकार करते हैं। बचाव पक्ष SEC द्वारा बताई गई ESG प्रतिबद्धताओं और कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा के बारे में बयानों को 'सिर्फ दिखावा' मानता है, यानी आम कॉर्पोरेट आशावाद।
यह रणनीति SEC के लिए एक चुनौती पेश करती है, जिसे धोखाधड़ी के इरादे को साबित करना होगा और अमेरिकी ज्यूरिसडिक्शन स्थापित करना होगा, खासकर 'Morrison' फैसले के बाद। कंपनी का हाई P/E रेश्यो, जो ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है, कानूनी समस्याओं या मार्केट की भावना बिगड़ने पर एक कमजोरी साबित हो सकता है।
एनालिस्ट्स का भरोसा कायम, AGEL पर 'Strong Buy' रेटिंग
लगातार कानूनी चुनौतियों और जांच के बावजूद, एनालिस्ट्स अडानी ग्रीन एनर्जी को लेकर काफी आशावादी बने हुए हैं। AGEL के लिए कंसेंसस रेटिंग 'Strong Buy' है, और कई एनालिस्ट्स अगले 12 महीनों में स्टॉक में बड़ी उछाल की भविष्यवाणी कर रहे हैं। औसत प्राइस टारगेट INR 1,194 से INR 1,396 के बीच है, जो 30% से अधिक की संभावित वृद्धि का संकेत देता है। हालांकि कुछ प्राइस टारगेट को एडजस्ट किया गया है, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का विश्वास AGEL के ऑपरेशंस और भारत के बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में इसकी मजबूत स्थिति पर कायम है। इन कानूनी मुद्दों से निपटना कंपनी की भविष्य की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होगा।