चेन्नई की नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने Aban Offshore Limited के कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में एक अहम फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने Punjab National Bank (PNB) को Aban Offshore के One Time Settlement (OTS) proposal पर लिए गए फैसले का रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 21 जनवरी, 2026 का है।
NCLAT का यह दखल दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए बिलकुल विपरीत बयानों के कारण आया है। Aban Offshore के निलंबित मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) का कहना है कि PNB ने 26 सितंबर, 2025 के एक पुराने आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें बैंक को OTS proposal पर विचार करने के लिए कहा गया था। वहीं, PNB के वकील का दावा है कि इस प्रस्ताव पर विचार किया गया था और बाद में इसे खारिज कर दिया गया।
यह कानूनी खींचतान Aban Offshore के CIRP में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। NCLAT का 'फैसले वाले मेमोरेंडम' के रूप में दस्तावेजी सबूत मांगने का इरादा रेजोल्यूशन प्रोसेस में पारदर्शिता और सही प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि PNB द्वारा जवाब दाखिल करने की दो हफ़्ते की समय सीमा तक, इस आदेश से संबंधित कोई और कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
इस मामले में सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कानूनी स्पष्टीकरण में देरी होने पर CIRP प्रक्रिया और खिंच सकती है, खासकर यदि OTS अंततः बिना किसी व्यवहार्य विकल्प के खारिज हो जाता है। Aban Offshore के लिए, एक असफल OTS अनिश्चितता को बढ़ा सकता है और कंपनी को लिक्विडेशन (Liquidation) की ओर ले जा सकता है, जिससे हितधारकों की रिकवरी (Recovery) पर असर पड़ेगा। निवेशक और क्रेडिटर 12 फरवरी, 2026 को PNB के जवाब का बेसब्री से इंतजार करेंगे। NCLAT के इस निर्देश का नतीजा Aban Offshore की रेजोल्यूशन प्रक्रिया के भविष्य को काफी हद तक प्रभावित करेगा।