KEC International: ₹6000 Cr पार रेवेन्यू, पर मार्जिन पर छाया संकट! नतीजों पर क्या बोलीं ब्रोकरेज?
Overview
KEC International ने Q3 FY26 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले **12%** बढ़कर **₹6,001 करोड़** रहा। हालांकि, मार्जिन पर दबाव के चलते नेट प्रॉफिट में हल्की गिरावट आई है।
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नतीजे उम्मीदों के मुताबिक, पर मार्जिन पर चिंता
KEC International ने हाल ही में Q3 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, जो मोटे तौर पर बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 12% बढ़कर ₹6,001 करोड़ पहुंच गया। यह ग्रोथ खासकर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) और केबल्स एंड कंडक्टर्स सेगमेंट से आई, जिनमें क्रमशः 31% और 37% की रेवेन्यू बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, सिविल और रिन्यूएबल्स सेगमेंट में रेवेन्यू घटा है। इस तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹127.46 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 1.62% कम है। इसका मुख्य कारण बढ़े हुए एम्प्लॉई कॉस्ट (Employee Cost) और नए लेबर कोड्स का असर बताया जा रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 20 बेसिस पॉइंट बढ़कर 7.2% दर्ज किया गया।
मजबूत ऑर्डर बुक बनी सहारा
मार्जिन पर दबाव के बावजूद, KEC International की ऑर्डर बुक एक बड़ी ताकत बनी हुई है। कंपनी ने Q3 FY26 में ₹13,500 करोड़ से ज्यादा के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। इस तरह, फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9MFY26) में कुल ऑर्डर इनफ्लो करीब ₹19,265 करोड़ हो गया है। कंपनी की ऑर्डर बुक और L1 पोजीशन (L1 Positions) मिलाकर ₹41,000 करोड़ से ज्यादा की हो गई है। T&D सेगमेंट से ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग इस सेक्टर को बूस्ट दे रही है। सरकार के बजट में भी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) बढ़ाने का ऐलान (जो ₹12.2 ट्रिलियन तक है) KEC जैसी कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत है।
मार्जिन पर क्यों आ रहा है दबाव?
एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि क्लेम सेटलमेंट (Claim Settlements) में संभावित देरी KEC International के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। इसी चिंता के चलते, FY26, FY27 और FY28 के लिए अर्निंग एस्टिमेट्स (Earnings Estimates) को 15%, 8% और 8% तक घटा दिया गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि हाई-मार्जिन वाले वॉटर प्रोजेक्ट्स (Water Projects) में धीमी प्रगति और मेट्रो प्रोजेक्ट्स (Metro Projects) को बंद करने की लागत के कारण नियर-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी (Near-term Profitability) पर असर पड़ा है। इस वजह से, FY26 के लिए EBITDA मार्जिन गाइडेंस को घटाकर 7-7.5% कर दिया गया है, जो पहले 8-8.5% था। हालांकि, कंपनी का लक्ष्य है कि पुराने प्रोजेक्ट्स पूरे होने और नए, बेहतर ऑर्डर्स पर काम शुरू होने के साथ FY28 तक मार्जिन को बढ़ाकर 9% तक ले जाया जाए।
ब्रोकरेज की 'BUY' राय
Motilal Oswal जैसे ब्रोकरेज हाउस KEC International को आकर्षक वैल्यूएशन (Valuation) पर ट्रेड करते हुए देख रहे हैं। शेयर का फॉरवर्ड PE मल्टीपल (Forward PE Multiple) FY27 के लिए 18x और FY28 के लिए 14.3x पर है। हालांकि, जनवरी 2026 में PE मल्टीपल 37.9x था और फरवरी 2026 तक यह करीब 26.00x बताया गया। इन नियर-टर्म मार्जिन चुनौतियों के बावजूद, Motilal Oswal ने स्टॉक पर 'BUY' रेटिंग बरकरार रखी है और दिसंबर 2027 के अनुमानित मुनाफे पर 20x मल्टीपल के आधार पर रिवाइज्ड टारगेट प्राइस ₹890 तय किया है। यह लक्ष्य कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक और भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के अनुकूल माहौल को देखते हुए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है।