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$3.55 ट्रिलियन ऑफशोर में छिपे: पनामा पेपर्स के 10 साल बाद भी जारी है ग्लोबल टैक्स सिस्टम की खामियां

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
$3.55 ट्रिलियन ऑफशोर में छिपे: पनामा पेपर्स के 10 साल बाद भी जारी है ग्लोबल टैक्स सिस्टम की खामियां
Overview

पनामा पेपर्स (Panama Papers) ने दुनिया भर में फाइनेंशियल सीक्रेसी (financial secrecy) का पर्दाफाश किए हुए एक दशक बीत चुका है। लेकिन, अमीर लोग अब भी करीब **$3.55 ट्रिलियन** की ऐसी संपत्ति को टैक्स बचाकर ऑफशोर (offshore) में छिपाए हुए हैं, जो दुनिया के **4.1 अरब** सबसे गरीब लोगों की कुल संपत्ति से भी ज़्यादा है। यह दिखाता है कि ग्लोबल टैक्स सिस्टम और वित्तीय पारदर्शिता में कितनी बड़ी खामियां मौजूद हैं।

ग्लोबल एलीट छिपा रहा $3.55 ट्रिलियन ऑफशोर में

पनामा पेपर्स ने ऑफशोर फाइनेंशियल स्ट्रक्चर (offshore financial structures) के राज़ खोले थे, लेकिन 10 साल बाद भी ग्लोबल एलीट (global elite) द्वारा छिपाए गए अनटैक्स्ड वेल्थ (untaxed wealth) का आंकड़ा चौंकाने वाला है। ऑक्सफैम (Oxfam) के ताज़ा विश्लेषण के अनुसार, 2024 में करीब $3.55 ट्रिलियन की संपत्ति ऑफशोर में छिपाई गई। यह राशि दुनिया की आधी आबादी ( 4.1 अरब लोग) की कुल संपत्ति से भी ज़्यादा है। यह मोटा अनुमान, जो ग्लोबल जीडीपी (global GDP) का लगभग 3.2% है, टैक्स हैवन (tax havens) और फाइनेंशियल सीक्रेसी (financial secrecy) की ताकत को दिखाता है। यह खुलासा यह भी बताता है कि सबसे अमीर 0.1% लोग इस छिपी हुई संपत्ति का लगभग 80%, यानी करीब $2.84 ट्रिलियन नियंत्रित करते हैं। इस ग्रुप में भी, सबसे अमीर 0.01% के पास लगभग $1.77 ट्रिलियन है। इस छिपी हुई दौलत की वजह से सरकारों को भारी टैक्स रेवेन्यू का नुकसान होता है, जो पैसा हेल्थकेयर और शिक्षा जैसी ज़रूरी पब्लिक सर्विसेज़ (public services) में लग सकता था।

छिपी हुई दौलत पब्लिक फंड्स को चूस रही है और इकोनॉमी को बिगाड़ रही है

अनटैक्स्ड ऑफशोर वेल्थ का लगातार बढ़ना सिर्फ़ असमानता का ही नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी (global economy) के लिए एक बड़ा ख़तरा भी है। यह छिपा हुआ पैसा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फ्लो (global investment flows) को बिगाड़ता है और फाइनेंशियल सिस्टम (financial system) में बॉरोइंग (borrowing) और फाइनेंशियल रिस्क (financial risks) को छुपा सकता है। जब खरबों डॉलर एक जगह जमा हो जाते हैं, तो वे प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट (productive investment) के रास्ते से हट जाते हैं, जिससे व्यापक आर्थिक ग्रोथ (broad-based economic growth) रुक सकती है। ऐसे में, यह पैसा अक्सर एसेट बबल्स (asset bubbles) को बढ़ावा देता है या छिपी हुई इन्वेस्टमेंट स्कीम्स (hidden investment schemes) में चला जाता है। इस टैक्स चोरी की वजह से होने वाले रेवेन्यू लॉस (revenue loss) का सबसे ज़्यादा असर डेवलपिंग नेशंस (developing nations) पर पड़ता है, जिनके पास डेवलपमेंट (development) और पब्लिक वेलफेयर (public welfare) के लिए ज़रूरी फंड्स की कमी हो जाती है। उदाहरण के लिए, दुनिया के 44 सबसे कम विकसित देशों का कंबाइंड जीडीपी (combined GDP) लगभग $1.775 ट्रिलियन अनुमानित है, जबकि $3.55 ट्रिलियन की अनटैक्स्ड ऑफशोर वेल्थ उनके कुल इकोनॉमिक आउटपुट (economic output) से दोगुनी से भी ज़्यादा है। पब्लिक गुड (public good) के लिए इस वेल्थ को हासिल करने में विफलता बजट डेफिसिट (budget shortfalls) और एड (aid) या लोन (loans) पर निर्भरता को बढ़ाती है।

ट्रांसपेरेंसी कोशिशें लूपहोल्स और देरी का सामना कर रही हैं

दुनिया भर में जागरूकता बढ़ने और कई इंटरनेशनल इनिशिएटिव्स (international initiatives) के बावजूद, ऑफशोर वेल्थ को रोकने में ठोस प्रगति धीमी और असमान रही है। ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन (Automatic Exchange of Information - AEOI) सिस्टम, जिसे क्रॉस-बॉर्डर टैक्स ट्रांसपेरेंसी (cross-border tax transparency) को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, 100 से ज़्यादा देशों में लागू है। हालांकि, हालिया एनालिसिस (analyses) बताते हैं कि कई लूपहोल्स (loopholes) और डिज़ाइन की कमियों की वजह से बैंक ऑफशोर वेल्थ के एक बड़े हिस्से को रिपोर्ट करने से बच सकते हैं, जिससे इसकी प्रभावशीलता सीमित हो जाती है। इसके अलावा, ग्लोबल साउथ (Global South) के कई देश महत्वपूर्ण ट्रांसपेरेंसी सिस्टम (transparency systems) से बाहर हैं, जिससे उन्हें ऑफशोर एसेट्स (offshore assets) को ट्रैक करने और टैक्स करने में मुश्किल होती है। 2027 तक एक फाइनल टेक्स्ट (final text) का लक्ष्य रखते हुए, एक यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टैक्स कोऑपरेशन (UN Framework Convention on International Tax Cooperation) की स्थापना के प्रयास जारी हैं। जबकि यह प्रक्रिया ज़्यादा समावेशी ग्लोबल टैक्स गवर्नेंस (global tax governance) की ओर एक कदम है, डेवलप्ड (developed) और डेवलपिंग देशों के बीच असहमति बनी हुई है। अमेरिका ने भी संभावित नतीजों को अस्वीकार करने का संकेत दिया है। एक ग्लोबल एसेट रजिस्ट्री (global asset registry) का आइडिया, जिसका मकसद यह पता लगाना है कि असल में एसेट्स का मालिक कौन है, इस पर भी चर्चा चल रही है, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने में काफी व्यावहारिक और राजनीतिक बाधाएं हैं।

सीक्रेसी क्यों बनी हुई है: ग्लोबल रूल्स का फायदा उठाना

ऑफशोर वेल्थ को छिपाने की लगातार सफलता ग्लोबल गवर्नेंस (global governance) में पावर इम्बैलेंस (power imbalance) और गैप्स (gaps) के व्यवस्थित इस्तेमाल को दर्शाती है। सबसे अमीर इंडिविजुअल्स (individuals) और कॉर्पोरेशन्स (corporations) मौजूदा रूल्स (rules) का चतुराई से फायदा उठाते हैं, सीक्रेसी (secrecy) बनाए रखने और टैक्स से बचने के लिए जटिल लीगल (legal) और फाइनेंशियल स्ट्रक्चर (financial structures) का इस्तेमाल करते हैं। AEOI जैसे उपायों की प्रभावशीलता इंटरनेशनल फाइनेंस (international finance) की जटिलता और अपारदर्शिता (opacity) से कम हो जाती है, जहाँ फाइनेंशियल प्रोफेशनल्स (financial professionals) इन स्कीम्स को सेट-अप करने में मदद करते हैं। जबकि कुछ स्टडीज (studies) ट्रांसपेरेंसी मेजर्स (transparency measures) के बाद ऑफशोर डिपॉजिट्स (offshore deposits) में कमी का संकेत देती हैं, फाइनेंशियल सीक्रेसी (financial secrecy) पर व्यापक असर और कम लिक्विड (less liquid) या ज़्यादा जटिल एसेट्स (assets) में वेल्थ रखे जाने की संभावना एक बड़ी चिंता बनी हुई है। टैक्स हैवन (tax havens) द्वारा दी जाने वाली इनहेरेंट सीक्रेसी (inherent secrecy), उनके फेवरेबल टैक्स पॉलिसीज (favorable tax policies) के साथ मिलकर, कैपिटल (capital) को आकर्षित करती रहती है, जिससे इवेजन (evasion) का एक सेल्फ-परपेचुएटिंग साइकिल (self-perpetuating cycle) बनता है।

टैक्स कोऑपरेशन के लिए आगे का रास्ता

यूएन टैक्स कन्वेंशन (UN Tax Convention) और ग्लोबल एसेट रजिस्टर्स (global asset registries) के आसपास चल रही चर्चाएं, ज़्यादा मजबूत इंटरनेशनल टैक्स कोऑपरेशन (international tax cooperation) की ओर एक संभावित, भले ही धीमा, बदलाव का संकेत देती हैं। हालांकि, ऑफशोर वेल्थ की गहरी जड़ें और स्टेटस क्वो (status quo) से लाभ उठाने वालों की शक्ति और प्रभाव को देखते हुए, बड़े बदलावों के लिए मजबूत पॉलिटिकल कमिटमेंट (political commitment) और सख्त एनफोर्समेंट (enforcement) की ज़रूरत होगी। एक्सट्रीम वेल्थ (extreme wealth) पर ज़्यादा टैक्स और वेल्थ टैक्स (wealth taxes) लगाने के ऑक्सफैम (Oxfam) के आह्वान, पॉलिसीमेकर्स (policymakers) के बीच बहस का एक मुख्य बिंदु बना हुआ है, जो IMF (IMF) की अपनी फिस्कल एडवाइस (fiscal advice) में वेल्थ टैक्सेशन पर सीमित फोकस के विपरीत है। फाइनेंशियल मार्केट्स (financial markets) का लगातार विकसित होना और एसेट कंसीलमेंट (asset concealment) के नए रूपों की संभावना का मतलब है कि ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव्स (transparency initiatives) को अनटैक्स्ड ऑफशोर वेल्थ (untaxed offshore wealth) की लगातार चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डायनामिक (dynamic) और एडैप्टिव (adaptive) बने रहने की ज़रूरत है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.