Mark Zandi की चेतावनी: US में मंदी का खतरा 'ऊंचा', नौकरी बढ़ने के बावजूद चिंता बरकरार

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Mark Zandi की चेतावनी: US में मंदी का खतरा 'ऊंचा', नौकरी बढ़ने के बावजूद चिंता बरकरार
Overview

अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा अभी भी बना हुआ है, भले ही हालिया जॉब रिपोर्ट में अच्छी खासी नौकरियां बढ़ने का आंकड़ा आया है। मूडीज एनालिटिक्स (Moody's Analytics) के चीफ इकोनॉमिस्ट मार्क जैंडी (Mark Zandi) ने चेतावनी दी है कि मंदी की आशंका 'चिंताजनक रूप से ऊंची' है।

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नौकरी बढ़ी, पर मंदी का साया गहराता क्यों?

हाल ही में अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट ने मार्च महीने के लिए 1,78,000 गैर-कृषि पेरोल (nonfarm payroll) की बढ़ोतरी का आंकड़ा जारी किया, जो 60,000 के अनुमान से काफी बेहतर था। यह फरवरी के 1,33,000 जॉब्स में आई गिरावट के बाद एक बड़ा उलटफेर है। हेल्थ केयर, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टरों में सबसे ज़्यादा नौकरियां जुड़ीं।

हालांकि, इस बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा काइज़र परमानेंट (Kaiser Permanente) स्ट्राइक खत्म होने के बाद हेल्थ केयर सेक्टर में लौटे कर्मचारियों की वजह से है। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि यह आंकड़ा शायद नौकरी जुड़ने की अंदरूनी कमजोर कड़ियों को छिपा रहा है। पिछले एक साल से 'कम हायर, कम फायर' (low hire, low fire) का पैटर्न जारी है, जिससे नेट जॉब क्रिएशन बहुत कम हुआ है। बेरोजगारी दर 4.3% पर स्थिर रही, लेकिन लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट में मामूली गिरावट बताती है कि कुछ लोग नौकरी खोजने की बजाय वर्कफोर्स से बाहर हो रहे हैं।

जैंडी का 'वॉयसियस साइकिल इंडेक्स' और मंदी की आशंका

मार्क जैंडी की मंदी को लेकर चिंताएं उनके अपने 'वॉयसियस साइकिल इंडेक्स' (Vicious Cycle Index) पर आधारित हैं। यह इंडिकेटर मंदी जैसी स्थितियां दर्शा रहा है, जिससे जैंडी का मानना है कि अगले एक साल में मंदी की 'लगभग बराबर संभावना' (close to even odds) है। मूडीज एनालिटिक्स ने मंदी की संभावना 49% बताई है, और चेतावनी दी है कि अगर ऑयल प्राइसेस ज़्यादा रहे तो यह 50% के पार जा सकती है।

अन्य फोरकास्ट भी बढ़ती मंदी की चिंताएं दिखा रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 12 महीने की प्रोबेबिलिटी को 25% से बढ़ाकर 30% कर दिया है, जबकि EY-पार्थेनॉन (EY-Parthenon) 40% की संभावना देख रहा है। ये बढ़ाए गए आंकड़े हालिया जियोपॉलिटिकल घटनाओं से पहले के अनुमानों के विपरीत हैं।

ग्लोबल झटके और आर्थिक कमजोरियां बढ़ा रहीं मंदी का डर

ईरान से जुड़ा संघर्ष (conflict involving Iran) आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ा रहा है और ग्लोबल स्टेबिलिटी के लिए खतरा पैदा कर रहा है। ऑयल की बढ़ती कीमतें, जो अब $100 प्रति बैरल को पार कर गई हैं, एक बड़ी चिंता हैं। यह सीधे तौर पर इंफ्लेशन (inflation) और कंज्यूमर स्पेंडिंग (consumer spending) को प्रभावित करता है, जिससे सेंट्रल बैंक की पॉलिसीज़ मुश्किल हो जाती हैं। धीमी ग्रोथ के साथ बढ़ती इंफ्लेशन की संभावना पॉलिसी मेकर्स के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है।

इस माहौल ने फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) से इंटरेस्ट रेट कट्स (interest rate cuts) की उम्मीदों को पीछे धकेल दिया है। ग्लोबल झटकों के अलावा, स्टॉक मार्केट वैल्यूएशन (stock market valuations) भी चिंता का विषय हैं। S&P 500 का शिलर CAPE रेश्यो (Shiller CAPE ratio) 40 के करीब है, और बफेट इंडिकेटर (Buffett Indicator) करीब 213% पर है। ऐतिहासिक रूप से, ये स्तर ओवरवैल्यूएशन (overvaluation) से जुड़े रहे हैं। BNP Paribas ने अर्निंग्स डाउनग्रेड्स (earnings downgrades) और प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) कंप्रेशन (PE compression) के जोखिमों को देखते हुए S&P 500 में और गिरावट की चेतावनी दी है।

लंबी अवधि की बेरोजगारी (long-term unemployment) भी बनी हुई है, जो एक और संरचनात्मक कमजोरी (structural weakness) को जोड़ती है।

आगे का रास्ता: ग्रोथ, इंफ्लेशन और पॉलिसी

आगे चलकर, 2026 के लिए अमेरिका की रियल जीडीपी ग्रोथ (real GDP growth) 1.8% से 2.5% के बीच रहने का अनुमान है, जो मध्यम विस्तार (moderate expansion) का संकेत देता है। वोलेटाइल एनर्जी मार्केट्स के कारण इंफ्लेशनरी प्रेशर (inflationary pressures) फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से ऊपर बने रहने की उम्मीद है। लगातार इंफ्लेशन और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं, यह दर्शाती हैं कि फेडरल रिजर्व संभवतः सतर्क मॉनेटरी पॉलिसी (cautious monetary policy) बनाए रखेगा, जिससे बड़े इंटरेस्ट रेट रिडक्शन में देरी हो सकती है। सप्लाई चेन्स (supply chains) और एनर्जी मार्केट्स पर वर्तमान जियोपॉलिटिकल टेंशन का पूरा आर्थिक प्रभाव एक बड़ा अज्ञात बना हुआ है, जो आर्थिक आउटलुक के लिए लगातार जोखिम पैदा कर रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.