विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव अगर 6 महीने या उससे ज़्यादा लंबा खिंचता है, तो 2026 तक वैश्विक आर्थिक विकास दर घटकर **1.3%** रह सकती है। यह धीमी रफ्तार महंगाई को फिर बढ़ा सकती है, ब्याज दरों को ऊंचा रख सकती है और विकासशील देशों पर कर्ज का बोझ बढ़ा सकती है, खासकर उन देशों पर जो ऊर्जा और सप्लाई चेन के लिए स्थिर माहौल पर निर्भर हैं।
Detailed Coverage
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट का साया
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संघर्षों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़ी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह संघर्ष अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक जारी रहता है, तो 2026 तक वैश्विक आर्थिक विकास दर घटकर केवल 1.3% रह सकती है। यह पिछले साल दर्ज की गई 2.9% की दर से काफी कम है।
महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति का खतरा
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि इससे महंगाई एक बार फिर बढ़ सकती है। विश्व बैंक के विश्लेषण से पता चलता है कि गंभीर परिदृश्यों में, वैश्विक महंगाई 4.5% तक पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में संभावित बाधाएं हैं।
खासकर, वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई चेन के कमजोर होने का खतरा बना हुआ है। शिपिंग में किसी भी तरह की रुकावट या ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान होने पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। दुनिया भर के निर्माताओं और परिवहन क्षेत्रों के लिए, इसका मतलब होगा परिचालन लागत में वृद्धि, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
कर्ज का बोझ और उभरते बाज़ार
लगातार बढ़ती महंगाई के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को ऊंची ब्याज दरों को लंबे समय तक बनाए रखना पड़ सकता है। इससे सरकारों, कंपनियों और व्यक्तियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। विकासशील देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 32 निम्न और मध्यम आय वाले देश पहले से ही कर्ज के भारी बोझ तले दबे हैं या ऐसे जोखिम का सामना कर रहे हैं।
जब वैश्विक ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो इन देशों के लिए अपने कर्ज चुकाना और भी मुश्किल हो जाता है। इससे एक मुश्किल चक्र शुरू हो सकता है, जहां सरकारों को स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संसाधनों को हटाकर कर्ज चुकाने पर खर्च करना पड़ सकता है। इनमें से कई देश अभी भी COVID-19 महामारी के आर्थिक झटकों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं और वैश्विक व्यापार में किसी भी तरह के झटके के प्रति बहुत संवेदनशील हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों और बाजार सहभागियों को तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार की मात्रा पर आने वाले आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए। ये आंकड़े सप्लाई चेन के स्वास्थ्य का शुरुआती संकेत दे सकते हैं। इसके अलावा, आने वाले महीनों में मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल कैसे बदल सकता है, यह समझने के लिए प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर दिए गए बयानों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। 2026 तक वैश्विक आर्थिक स्वास्थ्य के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक सप्लाई चेन इन दबावों का सामना कैसे करती है।
