वर्ल्ड बैंक का बड़ा ऐलान: $100 अरब की मदद
वर्ल्ड बैंक (World Bank) अगले 15 महीनों में मध्य पूर्व (Middle East) युद्ध से प्रभावित देशों को $80 अरब से $100 अरब तक की सहायता राशि देगा। यह रकम कोरोना महामारी के दौरान दी गई $70 अरब की मदद से भी ज़्यादा है। बैंक के प्रेसिडेंट अजय बंगा (Ajay Banga) ने बताया कि इस योजना में एक नया 'क्राइसिस रिस्पांस फंड' (Crisis Response Fund) भी शामिल है, जिससे देशों को तुरंत $20 अरब से $25 अरब तक की मदद मिल सकती है। इसके अलावा, मौजूदा कार्यक्रमों को री-पर्पस (repurpose) करके अगले छह महीनों में $30 अरब से $40 अरब और जुटाने की उम्मीद है। यदि ज़रूरत पड़ी तो बैंक अपने वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करके कुल $100 अरब का लक्ष्य पूरा करेगा।
IMF ने घटाई ग्लोबल ग्रोथ की उम्मीद, महंगाई बढ़ी
इस बड़ी सहायता की घोषणा ऐसे समय में आई है जब इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ (Global Economic Growth) के अपने अनुमानों को काफी घटा दिया है। IMF की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में ग्लोबल ग्रोथ अब 3.1% रहने की उम्मीद है, जो जनवरी के 3.3% के अनुमान से कम है। 2025 के लिए भी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 3.4% कर दिया गया है। IMF का कहना है कि युद्ध की वजह से बढ़ी एनर्जी प्राइस (Energy Prices) और सप्लाई चेन डिसरप्शन्स (Supply Chain Disruptions) इस गिरावट के मुख्य कारण हैं। अगर युद्ध के चलते एनर्जी की कीमतें बढ़ी रहीं और सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाते रहे, तो ग्लोबल ग्रोथ 2% या उससे भी नीचे जा सकती है, जिससे ग्लोबल मंदी (Global Recession) का खतरा बढ़ जाएगा। 2026 के लिए ग्लोबल इन्फ्लेशन (Global Inflation) का अनुमान बढ़ाकर 4.4% कर दिया गया है, जो पहले 3.8% रहने की उम्मीद थी।
विकासशील देशों पर सबसे ज़्यादा मार, मदद की ज़रूरत
डेवलपमेंट बैंक (Development Banks) इस संकट से निपटने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। IMF और वर्ल्ड बैंक मिलकर सलाह और आर्थिक मदद दे रहे हैं। IMF का अनुमान है कि गरीब और एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों को तुरंत $20 अरब से $50 अरब की इमरजेंसी एड (Emergency Aid) की ज़रूरत पड़ सकती है। वर्ल्ड बैंक के शुरुआती प्लान के तहत $25 अरब क्राइसिस टूल्स के ज़रिए और अगले छह महीनों में $70 अरब तक का इंतज़ाम किया जा सकता है। हालांकि, कई विकासशील देशों पर पहले से ही कर्ज़ का बोझ ज़्यादा है और उनके पास आर्थिक झटकों से निपटने के लिए सीमित गुंजाइश है। ऐसे में, वे युद्ध के असर के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हैं।
मदद की ज़रूरत और कर्ज़ का बोझ
वर्ल्ड बैंक की $100 अरब की मदद का वादा बड़ा है, लेकिन अगर मध्य पूर्व का संघर्ष लंबा खिंचता है तो यह सभी ज़रूरतों को पूरा कर पाएगा या नहीं, यह अभी कहना मुश्किल है। इकॉनोमिस्ट्स (Economists) सलाह दे रहे हैं कि एनर्जी सब्सिडी (Energy Subsidies) जैसे व्यापक उपायों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे महंगाई और बढ़ सकती है। इसके बजाय, टारगेटेड (Targeted) और अस्थायी उपायों पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, देशों द्वारा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए ज़्यादा कर्ज़ लेना, पहले से मौजूद पब्लिक डेट (Public Debt) को और बढ़ा रहा है, जिससे लॉन्ग-टर्म डेट स्टेबिलिटी (Long-term Debt Stability) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
आगे का रास्ता
IMF के चीफ इकॉनोमिस्ट पियरे-ओलिवियर गौरीन्चास (Pierre-Olivier Gourinchas) का कहना है कि भले ही युद्धविराम हो जाए, लेकिन जो नुकसान हुआ है, वह आसानी से ठीक नहीं होगा और जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं। IMF हेड क्रिस्टालिना जॉर्जियेवा (Kristalina Georgieva) ने जोर देकर कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी की रिकवरी (Global Economy Recovery) की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह गर्मी (Summer) तक जारी रहा, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।