World Bank का बड़ा ऐलान: भारत 'लोअर-मिडिल इनकम' ग्रुप में ही रहेगा, जानिए क्यों?

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AuthorNeha Patil|Published at:
World Bank का बड़ा ऐलान: भारत 'लोअर-मिडिल इनकम' ग्रुप में ही रहेगा, जानिए क्यों?

वर्ल्ड बैंक ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में भारत को 'लोअर-मिडिल इनकम' वाली इकोनॉमी के तौर पर बरकरार रखा है। हालांकि, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन ज़्यादा आबादी के चलते इसका ग्रॉस नेशनल इनकम (GNI) प्रति व्यक्ति तय सीमा से कम है।

इनकम क्लासिफिकेशन का मतलब

वर्ल्ड बैंक अपनी वार्षिक रिपोर्ट में देशों को उनकी ग्रॉस नेशनल इनकम (GNI) प्रति व्यक्ति के आधार पर बांटता है। यह आकलन पिछले कैलेंडर वर्ष के डेटा पर आधारित होता है। ये क्लासिफिकेशन अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निवेशकों के लिए किसी देश के आर्थिक विकास के स्टेज को समझने का एक ज़रिया है। समय-समय पर महंगाई और आर्थिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए ये थ्रेशोल्ड (सीमाएं) एडजस्ट की जाती हैं।

भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ और आबादी का खेल

भारत का 'लोअर-मिडिल इनकम' ब्रैकेट में बने रहना एक खास आर्थिक हकीकत को दर्शाता है। देश की इकोनॉमी भले ही तेज़ी से बढ़ रही हो, लेकिन GNI प्रति व्यक्ति (यानी देश की कुल कमाई को आबादी से बांटना) पर भारी आबादी का असर दिखता है। मज़बूत आर्थिक ग्रोथ के बावजूद, प्रति व्यक्ति आय में बड़ा सुधार लाने के लिए आबादी की ग्रोथ से ज़्यादा तेज़ रफ़्तार से आय बढ़नी ज़रूरी है।

किन देशों को मिला 'अपग्रेड'?

इस बार 6 देशों, जिनमें वियतनाम, फिलीपींस और श्रीलंका शामिल हैं, की इकोनॉमिक स्टेटस को अपग्रेड किया गया है। वियतनाम को अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में लाने में एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड स्ट्रैटेजी का बड़ा हाथ रहा। फिलीपींस ने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में डेवलपमेंट का फायदा उठाया। वहीं, श्रीलंका की री-क्लासिफिकेशन इंडस्ट्री, टूरिज्म और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में रिकवरी के बाद हुई। कुछ मामलों में, जैसे जॉर्डन और टोगो, अपग्रेड में नेशनल अकाउंट डेटा में बदलाव या नई जनगणना के आंकड़े जैसे तकनीकी कारण भी शामिल थे।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

बाजार के निवेशकों के लिए, ये क्लासिफिकेशन किसी देश की आर्थिक परिपक्वता और डेवलपमेंट के प्रोग्रेस का एक मैक्रो-लेवल इंडिकेटर होते हैं। हालांकि, इसका सीधा असर रोज़ाना के स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग या शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस पर नहीं पड़ता, पर यह भारत की उस लंबी यात्रा को दिखाता है जहां नागरिकों की औसत आय बढ़ाने का लक्ष्य है। आने वाले सालों में, राष्ट्रीय आर्थिक आउटपुट के मुकाबले प्रति व्यक्ति आय की ग्रोथ रेट पर नज़र रहेगी, क्योंकि सरकार मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर एक्सपोर्ट पर फोकस कर रही है।

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