Mutual Fund में महिलाओं की हिस्सेदारी 36%, पर फैसलों में अब भी पुरुषों का दबदबा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Mutual Fund में महिलाओं की हिस्सेदारी 36%, पर फैसलों में अब भी पुरुषों का दबदबा!

भारतीय महिलाओं के लिए अच्छी खबर है कि वे अब म्यूचुअल फंड एसेट्स का **36%** हिस्सा रखती हैं और कुल निवेशकों में **24%** की हिस्सेदारी रखती हैं। हालांकि, इस बड़ी प्रगति के बावजूद, एक बड़ी चिंता यह है कि कई महिलाएं अब भी निवेश और बीमा जैसे अहम वित्तीय फैसले खुद नहीं लेतीं, बल्कि परिवार के पुरुषों पर निर्भर रहती हैं।

मालिकाना हक़ और असल नियंत्रण के बीच की खाई

कैपिटल मार्केट्स के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय महिलाएं अब कुल म्यूचुअल फंड एसेट्स का लगभग 36% हिस्सा रखती हैं। जुलाई 2026 तक, महिलाओं ने लगभग 24% यूनिक म्यूचुअल फंड निवेशकों और करीब 28% ट्रेडिंग अकाउंट होल्डर्स में भी अपनी जगह बनाई है। यह पिछले सालों के मुकाबले एक बड़ी छलांग है, लेकिन इंडस्ट्री के लीडर्स का मानना है कि एसेट का मालिक होना वित्तीय आज़ादी की दिशा में सिर्फ पहला कदम है।

Fortune India की मोस्ट पावरफुल वुमेन (MPW) 2026 समिट में पहुंचे एक्सपर्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के नाम पर मौजूद कई फाइनेंशियल अकाउंट्स और इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियोज़ को असल में पुरुष रिश्तेदार ही मैनेज करते हैं। Moelis India की CEO, मनीषा गिरोत्रा ने कहा कि कई पढ़ी-लिखी महिलाएं भी अहम निवेश फैसलों के लिए परिवार के पुरुषों पर निर्भर रहती हैं। यह स्थिति दिखाती है कि जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) की सफलता के बाद, अब व्यक्तिगत आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान देना ज़रूरी है ताकि महिलाएं अपने एसेट्स को खुद संभाल सकें।

बीमा और कमाई का सीधा कनेक्शन

निवेश के अलावा, इंश्योरेंस सेक्टर भी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का एक अहम पैमाना है। Allianz Services की कंट्री हेड-इंडिया, रितु गंगल अरोड़ा ने बताया कि महिलाओं में इंश्योरेंस की पैठ सीधे तौर पर उनके रोज़गार और कमाई से जुड़ी हुई है। इंश्योरेंस के लिए 'इन्श्योरेबल इंटरेस्ट' की ज़रूरत होती है, जो अक्सर व्यक्तिगत आय से जुड़ा होता है। इस वजह से, मौजूदा आय के लैंगिक अंतर के चलते महिलाएं सुरक्षा और बचत योजनाओं में उतनी सक्रिय रूप से भाग नहीं ले पा रही हैं। इंडस्ट्री के सामने चुनौती यह है कि सिर्फ ज़्यादा महिलाओं को जोड़ना ही काफी नहीं, बल्कि उन्हें प्रोडक्ट चुनने और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्रोटेक्शन स्ट्रेटेजीज़ में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना भी ज़रूरी है।

टेक्नोलॉजी से मिलेगी वित्तीय साक्षरता को बूस्ट?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फिनटेक (FinTech) महिलाओं की वित्तीय साक्षरता को बढ़ाने में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। AI-संचालित प्लेटफॉर्म्स, जो सरल भाषा में और स्थानीय भाषाओं में पर्सनलाइज्ड सलाह दे सकते हैं, वो आत्मविश्वास की कमी को दूर कर सकते हैं। यह कमी फिलहाल कई महिलाओं को वेल्थ मैनेजमेंट में सक्रिय भूमिका लेने से रोक रही है। PL Capital Group की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर, अमीषा वोरा का सुझाव है कि ऐसे टूल्स अगले दशक में वित्तीय मार्गदर्शन को सबके लिए सुलभ बना सकते हैं। इंडस्ट्री के लिए यह देखना अहम होगा कि ये टेक्नोलॉजीज़ शहरों से बाहर रहने वाली महिलाओं तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाती हैं और उन्हें निष्क्रिय खाताधारकों से भारत की संपत्ति-निर्माण यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाती हैं।

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