Wipro ने अपने शेयरधारकों को पुरस्कृत करने के लिए ₹15,000 करोड़ का शेयर बायबैक (Share Buyback) करने का ऐलान किया है। यह बायबैक ₹250 प्रति शेयर पर किया जाएगा, जो मौजूदा क्लोजिंग प्राइस से करीब 19% ज्यादा है। यह कदम शेयर की वैल्यू को सहारा देने और निवेशकों को वापस पूंजी लौटाने के लिए उठाया गया है।
हालांकि, बायबैक की घोषणा के बावजूद, कंपनी के Q4 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। Wipro का नेट प्रॉफिट (Net Profit) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 1.85% घटकर ₹3,502 करोड़ रह गया। वहीं, रेवेन्यू (Revenue) 7.69% बढ़कर ₹24,236 करोड़ दर्ज किया गया।
कंपनी के कोर IT सर्विसेज सेगमेंट में धीमी ग्रोथ देखने को मिली, जो डॉलर टर्म्स में सिर्फ 0.6% रही। मैनेजमेंट की तरफ से Q1 FY27 के लिए IT सर्विसेज रेवेन्यू $2,597 मिलियन से $2,651 मिलियन के बीच रहने का अनुमान है, जो कॉन्स्टेंट करेंसी में -2.0% से 0% तक की फ्लैट से नेगेटिव ग्रोथ दिखा रहा है।
AI का असर, क्लाइंट्स की ओर से खर्च में सावधानी और डील साइकिल का लंबा होना IT सेक्टर के लिए चुनौतियां बढ़ा रहे हैं। प्रतिस्पर्धी Tata Consultancy Services (TCS) ने भी इसी तरह की मंदी का संकेत दिया है, जिसने अपने पूरे साल के डॉलर रेवेन्यू में गिरावट और बड़े डील बुकिंग में 18.3% की कमी दर्ज की है। बढ़ती वेतन लागत और अधिग्रहण एकीकरण खर्च भी Wipro जैसी IT कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल रहे हैं। मॉर्गन स्टेनली ने शेयर पर 'अंडरवेट' रेटिंग दी है।
HDFC Asset Management Company (AMC) की बात करें तो, Q4 FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) 2.5% घटकर ₹623 करोड़ रहा। इस अवधि में रेवेन्यू (Revenue) 17% बढ़कर ₹1,051 करोड़ दर्ज किया गया।
कंपनी ने ₹54 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने का प्रस्ताव रखा है। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 17% की मजबूत ग्रोथ के बावजूद, मार्जिन पर दबाव देखा गया। वोलैटाइल मार्केट-लिंक्ड इनकम और बढ़े हुए ऑपरेटिंग एक्सपेंस, खास तौर पर कर्मचारी खर्च में बढ़ोतरी (पिछले साल के ₹97 करोड़ से बढ़कर ₹125 करोड़ हुआ) ने मुनाफे को प्रभावित किया। ब्रोकरेज फर्म Emkay Global ने इसे 'Buy' रेटिंग दी है, जिसका टारगेट प्राइस ₹5,100 है, वहीं इसके प्रतिद्वंद्वी ICICI Prudential AMC ने 10% प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है।
Alok Industries Limited ने तिमाही में ₹192.54 करोड़ का बड़ा नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹74.47 करोड़ के घाटे से काफी ज्यादा है। रेवेन्यू (Revenue) में 3.14% की बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी को अपने ऑपरेशंस में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के लिए कंपनी का कुल नेट लॉस ₹744.11 करोड़ रहा। कंपनी के स्वामित्व में Reliance Industries और JM Financial Asset Reconstruction की भी हिस्सेदारी है, जो इसके परिचालन को स्थिर करने के प्रयासों को दर्शाती है।
कुल मिलाकर, IT सेक्टर AI और खर्च में कमी से जूझ रहा है, जबकि एसेट मैनेजमेंट कंपनियां AUM ग्रोथ को मुनाफे में बदलने के लिए लागत दबाव का सामना कर रही हैं। Alok Industries जैसी कपड़ा कंपनियों को मार्जिन सुधारने के लिए अपनी परिचालन दक्षता पर ध्यान देना होगा।