Bay Capital का मानना है कि AI पर ग्लोबल फोकस कम होने पर विदेशी निवेशक भारत का रुख कर सकते हैं। हालांकि, पिछले दो सालों में भारी बिकवाली हुई है, लेकिन घरेलू निवेश के सहारे बाजार संभला हुआ है। उम्मीद है कि FY2027 तक हालात सुधर सकते हैं।
AI का जोर कम, भारत की ओर मुड़ेगा फॉरेन कैपिटल?
भारतीय इक्विटी मार्केट में विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट बदलने वाला है। Bay Capital Investment Advisors की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस वाले मार्केट्स जैसे ताइवान, साउथ कोरिया और चीन से विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) का पैसा कम हो सकता है। ऐसे में, अगले फाइनेंशियल ईयर तक ये लिक्विडिटी भारत की ओर मुड़ सकती है।
पिछले दो सालों में FPIs ने भारत से करीब $36 बिलियन निकाले हैं। वहीं, इसी दौरान AI सप्लाई चेन से जुड़े बाजारों जैसे ताइवान में $34 बिलियन और साउथ कोरिया व चीन में कुल $40 बिलियन का इनफ्लो हुआ। भारत अकेला बड़ा इमर्जिंग मार्केट रहा जहां से विदेशी पैसा निकला, क्योंकि यह ग्लोबल AI स्टॉक इंडेक्स में शामिल नहीं था।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेड में रिस्क
Bay Capital ने AI पर आधारित मौजूदा मार्केट रैली की स्थिरता पर भी सवाल उठाए हैं। अनुमान है कि 2025 में ग्लोबल हाइपरस्केलर कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च $220 बिलियन तक पहुंच सकता है, जो 2021 में $100 बिलियन था। लेकिन, रिपोर्ट बताती है कि खर्च और बिजनेस रिजल्ट्स के बीच बड़ी खाई है। MIT की एक स्टडी के अनुसार, 95% कंपनियां जनरेटिव AI में किए गए इन्वेस्टमेंट पर कोई खास रिटर्न नहीं पा रही हैं। ऐसे में, 2000 के दशक की डॉट-कॉम बूम जैसी स्थिति बन सकती है।
डोमेस्टिक स्ट्रेंथ का कमाल
भले ही FPIs ने पैसा निकाला हो, लेकिन भारतीय मार्केट में डोमेस्टिक लिक्विडिटी ने इसे संभाले रखा है। म्यूचुअल फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 27% बढ़कर ₹65 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने करीब ₹21,000 करोड़ का इनफ्लो आ रहा है।
इस डोमेस्टिक डिमांड ने विदेशी बिकवाली के असर को कम किया है। भारत की GDP ग्रोथ FY2028 तक 6.7% रहने का अनुमान है और महंगाई भी कंट्रोल में है। एनालिस्ट्स का मानना है कि जब ग्लोबल इन्वेस्टर्स टेक्नोलॉजी की अटकलों के बजाय फंडामेंटल इकोनॉमिक ग्रोथ पर ध्यान देंगे, तो भारत फिर से आकर्षक बनेगा।
निवेशकों को अब उस बदलाव के पॉइंट पर नजर रखनी होगी, जब ग्लोबल लिक्विडिटी ब्रॉडर मार्केट फंडामेंटल्स को सपोर्ट करेगी। FPI एक्टिविटी में बदलाव और डोमेस्टिक इनफ्लो पर नजर रखना यह समझने के लिए जरूरी होगा कि क्या 2027 तक यह उम्मीद सच साबित होती है।
