थोक महंगाई 9.87% पर पहुंची! खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
थोक महंगाई 9.87% पर पहुंची! खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े

जून महीने में भारत की थोक महंगाई दर बढ़कर **9.87%** पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और खनिजों की कीमतों में आई तेजी इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रही। मई में यह दर **9.68%** थी, जो सप्लाई में दबाव का संकेत दे रही थी। निवेशकों को बढ़ती लागतों से कॉर्पोरेट प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले असर पर नज़र रखनी चाहिए।

खाने-पीने और खनिजों में महंगाई का भारी असर

जून में थोक महंगाई दर में आई बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाद्य महंगाई का 5.49% तक पहुंचना है, जो मई के 3.48% से काफी ज्यादा है। यह बढ़ोतरी खराब मौसम और अल नीनो की वजह से कृषि सप्लाई चेन पर पड़े असर से जुड़ी है। इसके अलावा, गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 11.07% रही, जबकि खनिजों के दाम 9.45% बढ़े। इन बेसिक चीजों के दाम बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

फ्यूल सेगमेंट में थोड़ी राहत, पर ग्लोबल रिस्क बरकरार

खाद्य और खनिज महंगाई बढ़ने के बावजूद, फ्यूल और पावर सेगमेंट में महंगाई थोड़ी कम हुई है। यह दर मई के 30.33% से घटकर 27.41% पर आ गई है। इसकी मुख्य वजह क्षेत्रीय संघर्षों में आए ठहराव के बाद ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में आई अस्थायी स्थिरता है। हालांकि, यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अभी भी एक वोलेटाइल (अस्थिर) क्षेत्र बना हुआ है। निवेशक मिडिल ईस्ट की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि किसी भी तनाव में बढ़ोतरी से कच्चे तेल के दाम फिर से बढ़ सकते हैं। इससे फ्यूल महंगाई में आई नरमी खत्म हो सकती है और थोक मूल्य सूचकांक पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे का अनुमान और नए इंडेक्स की ओर बदलाव

आने वाले महीनों के लिए अलग-अलग रिसर्च फर्मों की राय बंटी हुई है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का अनुमान है कि जुलाई में हेडलाइन महंगाई 10% के आसपास रह सकती है, जिसका कारण भू-राजनीतिक जोखिम और मौसम संबंधी कारक हैं। वहीं, BofA ग्लोबल रिसर्च का मानना है कि 2026 की तीसरी तिमाही तक थोक महंगाई में नरमी आनी शुरू हो जाएगी।

भारत में महंगाई को ट्रैक करने के तरीके में भी एक बड़ा बदलाव आने वाला है। सरकार अब आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की ओर बढ़ रही है, जो जून में 9.6% रहा। उम्मीद है कि यह नया इंडेक्स अगले पांच सालों में धीरे-धीरे मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह ले लेगा, जिससे प्रोडक्शन स्टेज पर कीमतों के विकास की बेहतर तस्वीर मिलेगी। निवेशकों के लिए आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनपुट लागतें स्थिर होती हैं या कॉर्पोरेट कमाई को निचोड़ना जारी रखती हैं।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.