पश्चिम एशिया संकट का भारत की ग्रोथ पर गहरा असर
चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के आर्थिक भविष्य को लेकर एक अहम चेतावनी जारी की है। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को FY27 के लिए अनुमानित इकोनॉमिक ग्रोथ पर एक बड़ा खतरा बताया है। यह अनुमान 27 फरवरी को GDP बेस ईयर में बदलाव के बाद तय किया गया था, और अब यह दबाव में दिख रहा है।
कैसे बिगड़ेगा भारत का इकोनॉमिक सीन?
'मंथली इकोनॉमिक रिव्यू' में इस संकट के भारत पर चार मुख्य असर बताए गए हैं:
- सप्लाई चेन में रुकावट: खासकर ऑयल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिसका असर एक्सपोर्ट पर भी पड़ेगा।
- इम्पोर्ट प्राइस में बढ़ोतरी: बाहरी सामान खरीदना महंगा हो जाएगा।
- लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इजाफा: शिपिंग और इंश्योरेंस जैसे खर्च बढ़ेंगे।
- रेमिटेंस पर असर: खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे (Remittances) में कमी आ सकती है।
इन सभी फैक्टर्स का भारत की ग्रोथ, महंगाई (Inflation) और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर सीधा असर पड़ेगा।
सरकारी खर्च में बदलाव और टारगेटेड राहत की जरूरत
नागेश्वरन ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को उन बिजनेसेज और आम लोगों को तुरंत राहत देनी चाहिए जो इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि सरकार को अपने बजट में लंबी अवधि की स्ट्रैटेजिक जरूरतों के लिए भी जगह बनानी चाहिए। इसमें सिर्फ एनर्जी सप्लाई ही नहीं, बल्कि अहम कमोडिटीज और मैटेरियल का रिजर्व बनाना भी शामिल है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं में सावधानीपूर्वक बदलाव करना होगा।
मार्च के मिले-जुले इकोनॉमिक संकेत
मार्च 2026 के शुरुआती इकोनॉमिक डेटा मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। ई-वे बिल जनरेशन में पिछले महीने की तुलना में गिरावट आई है, हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। फ्लैश PMI आंकड़ों के अनुसार, एनर्जी प्राइस शॉक की वजह से आउटपुट ग्रोथ धीमी हो सकती है। वहीं, डिमांड काफी हद तक स्थिर दिख रही है, जिसमें व्हीकल रजिस्ट्रेशन और डिजिटल पेमेंट वॉल्यूम में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। रूरल सेंटिमेंट में नरमी के संकेत हैं, लेकिन कुल कंजम्पशन ग्रोथ में सुधार हुआ है।
सप्लाई शॉक के बीच महंगाई पर नजर
रिव्यू में कहा गया है कि सप्लाई डिसरप्शन से लागत बढ़ रही है, जिससे लोकल इम्बैलेंस पैदा हो रहे हैं। अगर ऑयल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही तो महंगाई बढ़ सकती है। सरकार इस स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और घरेलू एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित करने व बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए कदम उठा रही है।