कारोबारों के लिए तत्काल सुरक्षा उपाय
FICCI की रिपोर्ट में कारोबारों के लिए तुरंत अपनाए जाने वाले वित्तीय और परिचालन (Operational) रणनीतियों का ज़िक्र किया गया है, ताकि बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के माहौल में टिके रहा जा सके। उद्योग जगत से कहा गया है कि वे 'मिडिल ईस्ट क्राइसिस' जैसी गंभीर स्थितियों को ध्यान में रखकर, सिचुएशन-बेस्ड बजटिंग (Scenario-based budgeting) अपनाएं। इससे सेल्स और मार्जिन को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलेगी। साथ ही, कंपनियों को अतिरिक्त फंडिंग लाइन्स (Funding lines) सुरक्षित करने और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच कैश फ्लो (Cash flows) को बचाने के लिए करेंसी रिस्क (Currency risks) को हेज (Hedge) करने की भी सलाह दी गई है।
ऑपरेशनल मोर्चे पर, रिपोर्ट में डिमांड पर फोकस करने, कच्चे माल (Inputs) के आधार पर प्रोडक्शन को अलाइन करने और शिपमेंट कंसॉलिडेशन (Shipment consolidation) के ज़रिए लॉजिस्टिक्स (Logistics) को बेहतर बनाने की सिफारिश की गई है। कई कंपनियों ने सप्लाई की कमी (Supply shortages) से निपटने के लिए क्रॉस-फंक्शनल 'वॉर रूम्स' (War rooms) पहले ही बना लिए हैं। इसके अलावा, बायोफ्यूल्स और इलेक्ट्रिफिकेशन (Electrification) जैसे मल्टी-फ्यूल विकल्पों के साथ एनर्जी सोर्स (Energy sources) को डाइवर्सिफाई करना, और सोलर व नेचुरल गैस जैसे विकल्पों पर निर्भरता बढ़ाना भी एक अहम लक्ष्य है।
लंबी अवधि की आर्थिक मजबूती की राह
लॉन्ग-टर्म रेजिलिएंस (Long-term resilience) यानी लंबी अवधि की मजबूती को हासिल करने के लिए, FICCI सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन (Supply chain diversification) यानी आपूर्ति श्रृंखलाओं को फैलाने और खास क्षेत्रों पर निर्भरता कम करने पर ज़ोर देता है। कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपने ग्लोबल सप्लायर बेस (Global supplier bases) को बढ़ाएं, डोमेस्टिक सोर्सिंग (Domestic sourcing) यानी घरेलू स्तर पर सोर्सिंग को मज़बूत करें और जहां संभव हो, बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward integration) को आगे बढ़ाएं।
रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable energy) को अपनाने, ग्रीन हाइड्रोजन (Green hydrogen) में निवेश और एनर्जी-एफिशिएंट टेक्नोलॉजीज (Energy-efficient technologies) पर ध्यान केंद्रित करते हुए एनर्जी ट्रांजिशन (Energy transition) को तेज़ी से आगे बढ़ाना एक प्राथमिकता है। फर्मों को क्लीनर एनर्जी सोर्स (Cleaner energy sources) की ओर बढ़ने में अपने वेंडर्स (Vendors) की मदद करने के लिए सहयोग करना चाहिए। लॉजिस्टिक्स रेजिलिएंस को भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, जिसके लिए अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स (Alternative trade routes), मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट (Multimodal transport) के विकल्पों का विस्तार और रियल-टाइम सप्लाई चेन विजिबिलिटी (Supply chain visibility) के लिए डिजिटल टूल्स (Digital tools) में निवेश का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में सरकार को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (Petroleum products) को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत लाने पर विचार करने की भी सलाह दी गई है, ताकि एफिशिएंसी (Efficiency) में सुधार हो और लागत का बोझ (Cost burdens) कम हो सके।