भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी निवेशकों की घबराहट
पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है, और इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। खासकर, इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार में 'हेजिंग' की गतिविधियां तेज हो गई हैं। हेजिंग को आप अपने निवेश के लिए एक तरह के 'इंश्योरेंस' की तरह समझ सकते हैं, जो बाजार में अचानक आने वाली गिरावट से बचाने में मदद करता है। इसी वजह से, बाजार सहभागियों का ध्यान अब सट्टेबाजी या मुनाफा कमाने से हटकर जोखिम कम करने पर केंद्रित हो गया है।
बाजार के रुझान और डेटा क्या कहते हैं?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इंडेक्स ऑप्शंस (Index Options) का प्रीमियम टर्नओवर अप्रैल में बढ़कर कुल डेरिवेटिव्स टर्नओवर का 35% पहुंच गया है। यह फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया संघर्ष के तेज होने से पहले के 25% के स्तर से काफी ऊपर है। हाल ही में एक सोमवार को तो यह गतिविधि चरम पर थी, जब इंडेक्स ऑप्शंस टर्नओवर कुल डेरिवेटिव्स वॉल्यूम का 43% यानी ₹82,600 करोड़ तक पहुंच गया था। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आई रुकावट के बाद बढ़ी हुई अस्थिरता (Volatility) थी। अगर पिछले साल की बात करें तो यह आंकड़ा सिर्फ 21% था। वहीं, मार्च में पूरे F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) बाजार का टर्नओवर 17 महीने के उच्च स्तर ₹52.78 लाख करोड़ पर था, जिसमें अकेले इंडेक्स ऑप्शंस का प्रीमियम टर्नओवर ₹16.25 लाख करोड़ का रिकॉर्ड स्तर छू गया। यह दिखाता है कि पोजीशन को सुरक्षित रखने या बीमा कराने की लागत काफी महंगी हो गई है।
पहले के झटके बनाम आज की संवेदनशीलता
इतिहास गवाह है कि पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में होने वाले भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से बाजार में पहले भी ऐसी ही हलचल देखी गई है। हालांकि, मौजूदा बाजार की स्थिति और नियामक बदलाव इस प्रवृत्ति को और बढ़ा रहे हैं। पहले जब ऐसे तनाव बढ़ते थे, तो भारतीय बाजारों में भारी गिरावट आती थी और अस्थिरता बढ़ जाती थी। उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में तनाव की आशंकाओं के चलते निफ्टी 50 में 7% से अधिक की गिरावट आई थी। आज, ट्रेडर्स भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रीमियम को पहले से ही अपने फैसलों में शामिल कर रहे हैं, जो उनकी बढ़ी हुई संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह हेजिंग की बढ़ती मांग इसलिए भी खास है क्योंकि यह अक्टूबर 2024 में सेबी (SEBI) द्वारा सट्टेबाजी को कम करने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के बाद आई है, जिसने पहले इंडेक्स ऑप्शन वॉल्यूम को कम कर दिया था।
संस्थागत निवेशक जोखिम प्रबंधन को दे रहे प्राथमिकता
इंडेक्स ऑप्शंस की यह मजबूत मांग मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) और अनुभवी ट्रेडर्स की ओर से आ रही है, जो अपनी पोजीशन को सुरक्षित रखने की रणनीति अपना रहे हैं। एक्सिस सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स के हेड, राजेश पाल्वीय बताते हैं कि इंडेक्स ऑप्शन प्रीमियम टर्नओवर असामान्य रूप से ऊंचा है, जबकि कुल बाजार वॉल्यूम में गिरावट देखी जा रही है। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक वैश्विक अनिश्चितताओं से अपने पोर्टफोलियो को बचाने के लिए सट्टेबाजी छोड़कर जोखिम प्रबंधन पर जोर दे रहे हैं। इंडेक्स ऑप्शंस को उनकी दक्षता, कैश सेटलमेंट और व्यापक बाजार जोखिम को प्रबंधित करने में कर लाभ (Tax Advantages) के कारण पसंद किया जाता है।
अंतर्निहित जोखिम और नियामक चुनौतियां
ऊंचे प्रीमियम बाजार की कमजोरी को छिपा रहे?
हालांकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में वृद्धि सक्रिय जोखिम प्रबंधन को दर्शाती है, यह बाजार की नाजुकता और संभावित गलत मूल्य निर्धारण (Mispricing) को भी उजागर करती है। ऊंचे प्रीमियम का मतलब है हेजिंग की भारी लागत, जो पूंजी को खत्म कर सकती है। इसके अलावा, सेबी के प्रयासों के बावजूद अभी भी कई खुदरा निवेशक F&O में सक्रिय हैं, ऐसे में कई छोटे खिलाड़ी अस्थिर मूल्य उतार-चढ़ाव से महत्वपूर्ण जोखिमों का सामना कर रहे हैं। भू-राजनीतिक खबरों और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों के प्रति बाजार की संवेदनशीलता एक लगातार खतरा बनी हुई है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो प्रीमियम इतने महंगे हो सकते हैं कि कम संसाधनों वाले ट्रेडर्स फंस सकते हैं। अस्थिरता के बावजूद F&O टर्नओवर में धीमी वृद्धि यह भी संकेत दे सकती है कि नियम बाजार की गहराई को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे तनाव के दौरान मूल्य में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
सेबी के नियमों की भू-राजनीति द्वारा परीक्षा
सेबी ने अक्टूबर 2024 में खुदरा निवेशकों की सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना और साप्ताहिक एक्सपायरी कम करना जैसे सख्त नियम पेश किए थे। हालांकि, वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति ने इन नियंत्रणों पर विजय प्राप्त की है, जिससे डेरिवेटिव्स वॉल्यूम बढ़ गया है। इन नियमों का उद्देश्य बाजार की स्थिरता को बढ़ावा देना और खुदरा निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाना था (जिसका अनुमान FY22-FY24 के बीच ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक था), लेकिन वर्तमान हेजिंग की मांग दर्शाती है कि परिष्कृत व्यापारी अभी भी इन उपकरणों का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं। यह अनिश्चितता इन नियमों के लिए एक चुनौती पेश कर सकती है, खासकर यदि अस्थिरता कम कारोबार वाले क्षेत्रों में तरलता (Liquidity) की समस्याएं पैदा करती है।
आगे का रास्ता: भू-राजनीतिक कारक हावी रहेंगे
ग्लोब कैपिटल मार्केट के सहायक उपाध्यक्ष, विपिन कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि भू-राजनीतिक संघर्ष बिगड़ता है तो ऑप्शन प्रीमियम बढ़ते रह सकते हैं। हालांकि हाल ही में अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदों से बाजार को कुछ राहत मिली है, लेकिन नाजुक शांति का मतलब है कि नकारात्मक खबरें तुरंत अस्थिरता वापस ला सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत आर्थिक विकास के दम पर भारत की दीर्घकालिक निवेश अपील ठोस बनी हुई है। हालांकि, निकट भविष्य में भू-राजनीतिक जोखिम बाजार की भावना और डेरिवेटिव्स गतिविधियों पर हावी रहेंगे। बाजार का अल्पकालिक रास्ता तनाव कम होने और वैश्विक कमोडिटी कीमतों, जैसे कच्चे तेल, पर इसके प्रभाव पर निर्भर करेगा।