तेल की कीमतों में आग, भारत पर 'एनर्जी टैक्स'
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिलहाल $105 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं, और अनुमान है कि यह ऊंची बनी रहेंगी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85% आयात करता है, ऐसे में यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था पर एक भारी 'एनर्जी टैक्स' की तरह काम कर रही है। खासकर, हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव ने ब्रेंट क्रूड को $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है, जो भारत की आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
रुपया कमजोर, महंगाई का खतरा बढ़ा
इस तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय रुपये पर भी दिख रहा है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के करीब फिसल गया है। मार्च 2026 में 3.4% पर रही भारत की सीपीआई (CPI) महंगाई दर के फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए करीब 4.6% तक बढ़ने का अनुमान है, जिसमें एनर्जी कीमतों में बढ़ोतरी एक बड़ा खतरा बनी हुई है। इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में बड़े उछाल से करेंसी में गिरावट और महंगाई में तेजी आती है। अनुमान है कि तेल की कीमतों में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) 40-50 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकता है।
RBI की दरों पर असर और CAD का बढ़ना
इन बाहरी जोखिमों और अनिश्चितताओं के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 8 अप्रैल, 2026 को हुई अपनी मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है और न्यूट्रल स्टैंड बरकरार रखा है। भारत की आर्थिक संरचना इन बाहरी ऊर्जा झटकों के प्रति संवेदनशील है। अनुमान है कि करंट अकाउंट डेफिसिट फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) में बढ़कर जीडीपी का 1.8%-2.0% हो सकता है, जो संभवतः 2.5% तक जा सकता है। यह स्थिति 1980 के दशक की शुरुआत के बाद पहली बार होगा जब बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में लगातार दो या तीन साल का घाटा देखा जाएगा। हालांकि, 17 अप्रैल, 2026 तक RBI के पास $703.3 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) है, जो कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
आगे की राह: रुपया पर दबाव, दरें स्थिर
आगे चलकर, भारतीय रुपया लगातार दबाव में रह सकता है और मार्च 2027 तक यह 96.5 के स्तर तक कमजोर हो सकता है। हॉरमुज जलडमरूमध्य में कोई भी लंबी रुकावट ब्रेंट क्रूड को $100-$110 के दायरे में धकेल सकती है, जिससे सीपीआई (CPI) महंगाई दर RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर जा सकती है। RBI की ब्याज दरें (Repo Rate) फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) तक 5.25% पर ही बने रहने की उम्मीद है। इन सब उपायों की प्रभावशीलता पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि और उसके वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ने वाले असर पर निर्भर करेगी।
