पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने उत्तरी बंगाल को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए एक बड़ी पहल की है। सीएम सुवेंदु अधिकारी ने **25** बंद पड़े चाय बागानों को फिर से खोलने और **125** दिनों के रोज़गार का वादा किया है, ताकि प्रवासी मज़दूर अपने घर लौट सकें।
Detailed Coverage
उत्तरी बंगाल का औद्योगिक कायाकल्प
पश्चिम बंगाल की सरकार उत्तरी बंगाल में औद्योगिक विकास को गति देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक खास योजना का ऐलान किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य रोज़गार पैदा करना और इस क्षेत्र के पुराने चाय उद्योग को फिर से ज़िंदा करना है। इस पहल के ज़रिए, प्रवासी मज़दूरों को स्थानीय स्तर पर काम देने की कोशिश की जाएगी। सरकार योग्य जॉब कार्ड धारकों को 125 दिनों तक रोज़गार की गारंटी भी दे रही है।
चाय बागानों का पुनरुद्धार और नई ज़मीन आवंटन
इस डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा 25 बंद पड़े चाय बागानों को फिर से चालू करना है। ये बागान इलाके में रोज़गार का एक बड़ा जरिया रहे हैं। सरकार, प्रधानमंत्री चाय वर्कर्स स्कीम के तहत ₹330 करोड़ का फंड भी मुहैया करा रही है, ताकि मज़दूरों को इस बदलाव के दौरान आर्थिक मदद मिल सके। उम्मीद है कि आने वाले 3 महीनों में इनमें से कई बागान फिर से काम शुरू कर देंगे, जिससे स्थानीय मज़दूरों को बड़ी राहत मिलेगी।
चाय उद्योग के अलावा, सरकार ने डेयरी कंपनी Amul को 15 एकड़ ज़मीन दी है, जहाँ वे अपने प्रोसेसिंग प्लांट्स लगाएँगे। यह कदम डेयरी सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देगा और लॉजिस्टिक्स व डिस्ट्रीब्यूशन जैसे क्षेत्रों में भी रोज़गार पैदा करेगा। साथ ही, मालदा में एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्रीज़, खासकर आम और लीची जैसे स्थानीय फलों से जुड़ी फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका मकसद कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
सामाजिक सुरक्षा का जाल
औद्योगिक पहलों के साथ-साथ, सरकार लौट रहे मज़दूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी लागू कर रही है। इसमें फ्री राशन, आयुष्मान भारत हेल्थ इंश्योरेंस और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ शामिल है।
यह ऐलान सिक्किम के नामची जिले में हुए एक दुखद टनल हादसे के बाद आया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के 11 मज़दूरों की जान चली गई थी। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹21 लाख की आर्थिक सहायता दी है। साथ ही, 9 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को रोज़गार देने का भी ऐलान किया गया है।
अब बाज़ार की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि चाय बागानों के खुलने और नए डेयरी व फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट्स के निर्माण में कितना समय लगता है। इन पहलों की सफलता प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन और प्राइवेट कोऑपरेटिव्स व फ़ूड प्रोसेसर को स्थानीय अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने की राज्य की क्षमता पर निर्भर करेगी।
