उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत में खुलने वाले सभी नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में से **10%** पर कब्जा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए एक हाई-लेवल एडवाइजरी बोर्ड का गठन किया गया है। राज्य की योजना नोएडा के बाहर लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों में भी अपना टेक फुटप्रिंट बढ़ाने की है, ताकि **$1 ट्रिलियन** की इकोनॉमी का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
Detailed Coverage
UP सरकार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत में स्थापित होने वाले सभी नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में से 10% को अपने राज्य में आकर्षित करने के लिए एक स्ट्रेटेजिक रोडमैप की घोषणा की है। GCC Summit 2026 में इस योजना का खुलासा किया गया। इसका उद्देश्य राज्य के टेक इकोसिस्टम को सिर्फ नोएडा और ग्रेटर नोएडा के क्लस्टर से आगे बढ़ाकर लखनऊ, वाराणसी, आगरा और प्रयागराज जैसे उभरते हब तक फैलाना है।
नई सलाहकार समिति और पॉलिसी सपोर्ट
इस विस्तार को गति देने के लिए, राज्य सरकार ने एक हाई-लेवल GCC एडवाइजरी बोर्ड का गठन किया है। इस बोर्ड में इंडस्ट्री, सरकार और अकादमिक जगत के सदस्य शामिल हैं। इनका काम विभिन्न विभागों के बीच तालमेल को आसान बनाना और निवेश की मंजूरी को तेज करना है। इस पहल के तहत, मल्टीनेशनल कंपनियों को बेहतर इंसेंटिव देने के लिए राज्य की IT और IT-इनेबल्ड सर्विसेज पॉलिसी को अपडेट किया जाएगा। निवेशक-अनुकूल माहौल बनाकर, सरकार इन सेंटर्स की स्थापना को सुव्यवस्थित करना चाहती है, जिन्हें अक्सर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट सपोर्ट की ज़रूरत होती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक लक्ष्य
GCCs को बढ़ावा देने का यह कदम उत्तर प्रदेश के $1 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। वर्तमान में, राज्य में 100 से अधिक GCCs मौजूद हैं, और अधिकारियों ने 2030 तक 500 ऐसे केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसे हासिल करने के लिए, राज्य डीप टेक हब और विस्तृत डेटा सेंटर सुविधाओं सहित विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहा है।
व्यापारियों और निवेशकों के लिए, इस इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के वास्तविक कार्यान्वयन पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर के शहरों में टैलेंट और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता में सुधार हो रहा है, लेकिन इन नए सेंटर्स की बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे स्थापित टेक हब के साथ प्रतिस्पर्धा करने और उच्च-कुशल श्रम को आकर्षित करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
निवेशकों को राज्य की IT पॉलिसी में आगामी संशोधनों और रेड टेप को कम करने में नए एडवाइजरी बोर्ड की प्रभावशीलता पर नज़र रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, इस रणनीति की सफलता राज्य की नई विशेष स्किलिंग प्रोग्राम्स के माध्यम से इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट की पाइपलाइन बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगी। उत्तर प्रदेश में GCC सेक्टर का विकास राज्य में रियल एस्टेट, डेटा सेंटर प्रोवाइडर्स और रीजनल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचा सकता है।
