अमेरिका की सख्त चेतावनी: क्या है पूरा मामला?
यह बड़ा डेवलपमेंट रूस के तेल रेवेन्यू (Revenue) को रोकने के अमेरिकी प्रयासों का हिस्सा है, जिसे यूक्रेन पर उसके आक्रमण का एक प्रमुख वित्तीय स्रोत माना जाता है। अमेरिका अब भारत की एनर्जी परचेजिंग पर पैनी नजर रख रहा है, और साफ कहा है कि अगर भारत ने रूस से सीधा या परोक्ष रूप से तेल आयात फिर से शुरू किया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में भारतीय सामानों पर जो 25% एड वैलोरम ड्यूटी (Ad Valorem Duty) लगाई गई थी, वह फिर से लागू हो सकती है।
व्यापार डील पर संकट के बादल
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ था, जिसका मकसद भारतीय एक्सपोर्ट्स (Exports) पर टैरिफ कम करना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते में भारत द्वारा रूस से तेल आयात कम करने की भूमिका रही थी। ब्लूमबर्ग (Bloomberg) द्वारा संकलित जहाजों की ट्रैकिंग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत को रूसी कच्चे तेल की सप्लाई घटकर लगभग 1.12 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गई, जो दिसंबर 2025 के 1.2 मिलियन बैरल से कम है। यह नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
भारत की एनर्जी स्ट्रेटेजी
नई दिल्ली (New Delhi) लगातार यह कहता रहा है कि 1.4 अरब की अपनी आबादी के लिए सप्लाई सिक्योरिटी (Supply Security) सुनिश्चित करने हेतु एनर्जी स्रोतों में विविधता लाना उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने 5 फरवरी, 2026 को दोहराया था कि देश वेनेजुएला (Venezuela) जैसे देशों से नए क्रूड सप्लाई (Crude Supply) विकल्पों के व्यावसायिक लाभों का पता लगाने के लिए खुला है। एनर्जी डाइवर्सिफिकेशन (Energy Diversification) भारत की व्यापक आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
व्हाइट हाउस का रुख
व्हाइट हाउस (White House) की ओर से जारी एक बयान में अमेरिकी निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) को स्पष्ट किया गया है। यदि वाणिज्य सचिव (Secretary of Commerce) यह पाते हैं कि भारत ने रूसी फेडरेशन (Russian Federation) से तेल का सीधा या परोक्ष आयात फिर से शुरू कर दिया है, तो विदेश सचिव (Secretary of State), वित्त सचिव (Treasury Secretary) और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative) सहित कई प्रमुख अधिकारियों के परामर्श से आगे की कार्रवाई की सिफारिश करेंगे। इन सिफारिशों में भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत एड वैलोरम ड्यूटी को फिर से लागू करना शामिल हो सकता है। यह कदम द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को काफी बाधित कर सकता है और अमेरिकी बाजार पर निर्भर क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।