Infosys के नतीजों पर फिरा पानी, US Solar Tariffs का बड़ा झटका! भारतीय शेयर बाज़ार में मची खलबली

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Infosys के नतीजों पर फिरा पानी, US Solar Tariffs का बड़ा झटका! भारतीय शेयर बाज़ार में मची खलबली
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार में आज मिले-जुले संकेत दिख रहे हैं। एक तरफ अमेरिका द्वारा भारतीय सोलर प्रोडक्ट्स पर लगाए गए नए टैरिफ (Tariffs) ने चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर Infosys के तिमाही नतीजों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली है, जिससे बाज़ार में थोड़ी सतर्कता बनी हुई है।

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अमेरिका का बड़ा वार: भारतीय सोलर एक्सपोर्ट पर लगे भारी टैक्स

अमेरिका के वाणिज्य विभाग (U.S. Commerce Department) ने भारतीय सोलर प्रोडक्ट्स पर अचानक 125.87% तक के काउंटरवेलिंग ड्यूटी (countervailing duties) लगाने का ऐलान कर दिया है। इससे भारत के रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपोर्ट (renewable energy exports) को बड़ा झटका लगने की आशंका है। अमेरिका, भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरर्स के लिए 67% तक का बड़ा बाज़ार रहा है, जहाँ 2025 में $4.5 बिलियन का एक्सपोर्ट हुआ था। फरवरी 2026 में हुए एक ट्रेड डील (trade deal) के बावजूद, यह कदम भारतीय कंपनियों की अमरीकी बाज़ार में कॉम्पिटिशन (competitiveness) को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

Infosys के नतीजे, पर निवेशकों की मुस्कान गायब!

दूसरी ओर, भारतीय IT सेक्टर के लिए भी खबर बहुत अच्छी नहीं है। Infosys ने अपने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे पेश किए, जिसमें कंपनी ने $0.23 प्रति शेयर की कमाई (EPS) और $5.04 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया। ये नतीजे एनालिस्ट्स (analysts) की उम्मीदों से बेहतर थे। हालांकि, इसके बावजूद Infosys के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 5.49% गिर गए। यह दिखाता है कि बड़े नतीजों के बावजूद, बड़े IT स्टॉक्स पर निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।

IT सेक्टर का वैल्यूएशन और भविष्य की राह

Infosys का P/E रेश्यो (P/E ratio) फिलहाल 18.25 के आसपास है, जो Wipro के 16.13 और TCS के 17.73 के करीब है। इसकी तुलना में Accenture का 15.6 और IBM का 22.2 है। Infosys ने FY27 के लिए 1.5% से 3.5% तक के रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है, जो पिछली अवधियों की तुलना में धीमी रफ्तार को दर्शाता है। इससे यह साफ है कि निवेशक अब कंपनियों के नतीजों से ज्यादा, भविष्य की ग्रोथ (growth) और मार्जिन (margins) की स्थिरता पर ध्यान दे रहे हैं।

FIIs की बिकवाली और DIIs की खरीदारी

बाज़ार में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) अप्रैल 2026 में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, उन्होंने अब तक करीब ₹39,224 करोड़ निकाले हैं। वहीं, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) खरीदारी कर रहे हैं और उन्होंने ₹29,696 करोड़ का निवेश किया है, जो बाज़ार को सहारा दे रहे हैं। 23 अप्रैल 2026 को FIIs ने ₹3,254.71 करोड़ की बिकवाली की, जबकि DIIs ने ₹941.35 करोड़ की खरीदारी की।

सोलर सेक्टर के लिए सबसे बड़ा रिस्क (risk) यह है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय प्रोडक्ट्स वहां महंगे हो जाएंगे और एक्सपोर्ट मुश्किल होगा। भारत का लगभग 95% सोलर मॉड्यूल एक्सपोर्ट अमरीका को होता है, जिससे यह सेक्टर इस एक बाज़ार पर बहुत ज्यादा निर्भर है। साथ ही, सोलर सेल और वेफर्स के लिए चीन पर निर्भरता सप्लाई चेन (supply chain) के जोखिम को बढ़ाती है।

IT सेक्टर की बात करें तो Infosys के धीमी ग्रोथ के अनुमान और मार्जिन पर दबाव, इस सेक्टर के लिए चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

आगे का रास्ता: IT और रिन्यूएबल एनर्जी

Infosys के 20% से 22% के ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margins) के अनुमान के बावजूद, धीमी ग्रोथ के संकेत मिल रहे हैं। भारत सरकार अपने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) स्कीमों के ज़रिए डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग (domestic manufacturing) को बढ़ावा दे रही है, ताकि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर अपने 2030 तक 500 GW के लक्ष्य को पूरा कर सके। IT और रिन्यूएबल एनर्जी, दोनों सेक्टर्स का भविष्य जटिल ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी (global trade policies) और बदलती मांग पर टिका रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.