US Visa Fees: भारतीय छात्रों पर $100,000 का झटका? अमेरिका में पढ़ने-लिखने वालों के लिए बड़ी खबर

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AuthorMehul Desai|Published at:
US Visa Fees: भारतीय छात्रों पर $100,000 का झटका? अमेरिका में पढ़ने-लिखने वालों के लिए बड़ी खबर

अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सरकार कथित तौर पर OPT (Optional Practical Training) प्रोग्राम का इस्तेमाल करने वाले अंतरराष्ट्रीय स्नातकों के लिए **$100,000** (लगभग ₹83 लाख) की भारी-भरकम फीस लगाने पर विचार कर रही है। यह कदम भारत से अमेरिका में पढ़ाई करने और काम करने की चाहत रखने वाले हजारों छात्रों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

OPT प्रोग्राम पर नई फीस का प्रस्ताव

अमेरिकी 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी' (Department of Homeland Security) OPT प्रोग्राम के तहत पोस्ट-स्टडी वर्क एक्सपीरियंस लेने वाले विदेशी ग्रेजुएट्स के लिए एक नई फीस लागू करने की योजना बना रहा है। OPT अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है, जो स्टूडेंट्स को उनकी पढ़ाई के क्षेत्र में अनुभव हासिल करने का मौका देता है। अगर यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारत से आने वाले उन हजारों छात्रों के लिए बड़ी आर्थिक मुसीबत खड़ी कर सकता है, जो अक्सर अमेरिका की टेक और इंजीनियरिंग कंपनियों में काम करके अनुभव प्राप्त करते हैं।

उच्च शिक्षा और टैलेंट पर क्या होगा असर?

OPT प्रोग्राम की वजह से ही कई छात्र अमेरिकी यूनिवर्सिटीज को चुनते हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में करीब 419,000 लोगों ने इस प्रोग्राम में हिस्सा लिया। पढ़ाई के बाद काम करने की सुविधा मिलना, अमेरिका की महंगी डिग्री में निवेश करने का एक बड़ा कारण है। ऐसे में, इतनी बड़ी फीस लगने से कई छात्र अपनी पढ़ाई की योजनाओं पर फिर से विचार करने पर मजबूर हो सकते हैं या फिर उन देशों का रुख कर सकते हैं जहां पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर सस्ते हों। इसका सीधा असर उन अमेरिकी यूनिवर्सिटीज पर भी पड़ेगा जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों की ट्यूशन फीस पर काफी निर्भर करती हैं।

पहले भी हुए हैं ऐसे प्रयास

यह कोई पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह की फीस लाने की कोशिश की हो। इससे पहले, H-1B वीजा (जो अक्सर प्रोफेशनल्स इस्तेमाल करते हैं) के लिए भी $100,000 की फीस का प्रस्ताव था, लेकिन बड़े नियोक्ताओं के विरोध के बाद इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. State Department) कुछ ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए $100,000 का बॉन्ड लागू करने पर भी विचार कर रहा था, जो आवेदक के अमेरिकी नागरिक बनने पर ही वापस मिलता। ये कदम दिखाते हैं कि अमेरिकी सरकार कानूनी एंट्री और वर्कफोर्स भागीदारी को मैनेज करने के लिए अपने इमिग्रेशन टूल्स की लगातार समीक्षा कर रही है।

कंपनियों और निवेशकों के लिए जोखिम

यह खबर भारतीय IT और इंजीनियरिंग सेक्टर की कंपनियों और निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई भारतीय टेक कंपनियों के अमेरिका में बड़े ऑपरेशन्स हैं और वे विशेष भूमिकाओं को भरने के लिए कुशल ग्रेजुएट्स पर निर्भर करती हैं। यदि विदेशी टैलेंट को बनाए रखने की लागत अचानक बढ़ जाती है, तो इससे वेतन दबाव (Wage Pressure) बढ़ सकता है या अमेरिकी ऑपरेशन्स के लिए टैलेंट की कमी हो सकती है।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी निगरानी यह होगी कि क्या यह प्रस्ताव आधिकारिक विधायी कार्रवाई की ओर बढ़ता है या यह सिर्फ डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का एक विचाराधीन मसौदा बना रहता है। किसी भी आधिकारिक अधिसूचना या सार्वजनिक टिप्पणी अवधि पर नजर रखना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा, क्योंकि इससे संभावित फीस के दायरे और समय-सीमा के बारे में स्पष्टता मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.