मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई, खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। नैस्डैक (Nasdaq) 2% से ज़्यादा टूटा। निवेशकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी खर्च और फेडरल रिज़र्व (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ी संभावना को लेकर चिंता है। ग्लोबल गिरावट का असर भारतीय आईटी शेयरों और विदेशी निवेश पर भी पड़ सकता है।
क्या हुआ?
मंगलवार को वॉल स्ट्रीट (Wall Street) की शुरुआत काफी गिरावट के साथ हुई, क्योंकि टेक्नोलॉजी सेक्टर में व्यापक बिकवाली देखी गई। नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite), जिसमें बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं, शुरुआती कारोबार में 2% से ज़्यादा गिर गया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) और एसएंडपी 500 (S&P 500) जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। सेमीकंडक्टर और मेमोरी स्टोरेज कंपनियों को भारी नुकसान हुआ। अमेरिकी बाज़ारों की यह गिरावट ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है, जहाँ एशियाई बाज़ारों में भी बड़ी गिरावट देखी गई, जिसमें दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 10% और जापान का निक्केई (Nikkei) 3.6% टूटा।
बाज़ार की चिंता का कारण?
बाज़ार में मौजूदा अस्थिरता के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला भारी खर्च और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदें। विश्लेषकों का कहना है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश को लेकर निवेशकों में चिंता बढ़ रही है कि क्या ये निवेश तुरंत मुनाफा देंगे। साथ ही, फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) के और ज़्यादा सख़्त होने की आशंकाएं बढ़ी हैं। बाज़ार के आंकड़ों के अनुसार, साल के अंत तक कम से कम एक बार ब्याज दरें बढ़ाने की 90% संभावना है, जो पिछले हफ़्ते की 57% से काफ़ी ज़्यादा है। ऊंची ब्याज दरें भविष्य की कमाई के वर्तमान मूल्य को कम करती हैं, जिसका सीधा असर ग्रोथ वाले टेक शेयरों पर पड़ता है।
टेक दिग्गजों पर असर
बिकवाली बड़ी टेक कंपनियों में भी फैली। Alphabet, Nvidia और Tesla जैसी कंपनियों के शेयर पिछले सत्रों की गिरावट को और बढ़ा गए। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर ख़ास असर पड़ा, Micron Technology 11% से ज़्यादा और Intel 7% से ज़्यादा गिरा। Qualcomm, SanDisk और Seagate जैसी कंपनियों में भी बड़ी गिरावट आई। निवेशक इन मूव्मेंट्स पर करीब से नज़र रख रहे हैं, क्योंकि यह ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में टेक कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर जोखिम की भावना में बड़े बदलाव को दर्शाता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?
भारतीय निवेशक अक्सर अमेरिकी बाज़ार के रुझानों पर बारीकी से नज़र रखते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि US टेक सेक्टर और भारत की आईटी सर्विस इंडस्ट्री के बीच गहरा संबंध है। ग्लोबल टेक दिग्गजों में लगातार गिरावट का असर घरेलू आईटी शेयरों पर भी पड़ सकता है, जो ग्लोबल खर्च के पैटर्न और सेंटीमेंट के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yield) में वृद्धि—10 साल की यील्ड अब 4.49% के करीब है—ग्लोबल फंड्स के लिए उभरते बाज़ारों की इक्विटी (Emerging Market Equities) को कम आकर्षक बना सकती है। अगर अमेरिकी बाज़ार अस्थिर रहते हैं, तो भारतीय बाज़ारों में सावधानी देखी जा सकती है, खासकर फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) के फ्लो को लेकर, जो अक्सर ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति के प्रति संवेदनशील होते हैं।
आगे क्या देखें?
ग्लोबल बाज़ारों के लिए तत्काल ध्यान गुरुवार को जारी होने वाले मई के अमेरिकी कंज्यूमर इन्फ्लेशन डेटा (US Consumer Inflation Data) पर रहेगा। यह डेटा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फेडरल रिज़र्व के भविष्य की ब्याज दरों को लेकर निर्णयों को प्रभावित करेगा। निवेशक यह जानने की कोशिश करेंगे कि महंगाई कम हो रही है या और ज़्यादा सख़्ती की ज़रूरत है। भारतीय बाज़ार के लिए, अगले कुछ दिन यह देखने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि क्या ग्लोबल सेंटीमेंट घरेलू सूचकांकों को प्रभावित करता है या स्थानीय आईटी सेक्टर अंतरराष्ट्रीय बिकवाली के बीच टिकाऊ रहता है।
