भू-राजनीतिक शांति और मजबूत अर्निंग्स से बाज़ार में आई तेज़ी
मध्य पूर्व में तनाव कम होने और तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते अमेरिकी शेयर बाज़ार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। अप्रैल 2026 में, भू-राजनीतिक तनाव के कम होने से निवेशकों का सेंटीमेंट मजबूत हुआ, जिससे मार्च के निचले स्तर से बाज़ार में 13% का उछाल आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से तनाव कम करने के संकेतों और युद्धविराम की खबरों ने बाज़ार को सहारा दिया। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से भी सप्लाई की चिंताओं को कम किया।
तेल की कीमतों में गिरावट से ग्रोथ सेक्टर्स को बढ़ावा
भू-राजनीतिक तनाव ठंडा पड़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, जो एक हफ्ते में 13% से ज्यादा गिर गईं। इस गिरावट ने बढ़ती इनफ्लेशन (मुद्रास्फीति) और इकॉनमी में मंदी की आशंकाओं को कम किया। इसके परिणामस्वरूप, निवेशकों ने डिफेंसिव एनर्जी स्टॉक्स से पैसा निकालकर ग्रोथ सेक्टर्स की ओर रुख किया। टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशन सर्विसेज और फाइनेंशियल कंपनियों में निवेश बढ़ा, क्योंकि आर्थिक आउटलुक बेहतर होता दिख रहा था।
सॉलिड कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस का मिला साथ
इस तेज़ी को कंपनियों के सॉलिड परफॉर्मेंस का भी सहारा मिला। अप्रैल के मध्य तक, S&P 500 की करीब एक-चौथाई कंपनियों ने पहली तिमाही के नतीजे पेश कर दिए थे। इनमें से 83% कंपनियों ने वॉल स्ट्रीट की अर्निंग्स एक्सपेक्टेशंस को पार किया, जो हाल के सबसे बेहतरीन नतीजों में से एक था। Goldman Sachs ने 2026 और 2027 के लिए अपनी अर्निंग्स एस्टीमेट्स को 4% तक बढ़ाया है, जिसमें एनर्जी और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर्स ने इन अपग्रेड्स में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
टेक दिग्गजों ने खींची बाज़ार की नैया
बाज़ार की इस बढ़त में बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का योगदान अहम रहा। Nvidia, Alphabet, Apple, Amazon और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियों ने 30 मार्च के निचले स्तर के बाद से S&P 500 के 40% तक के मुनाफे में योगदान दिया, जिससे उनकी मार्केट वैल्यू में खरबों डॉलर का इजाफा हुआ। AI डिमांड को लेकर नए सिरे से उत्साह ने निवेशकों को ग्रोथ स्टॉक्स की ओर फिर से खींचा।
सकारात्मक Outlook के बीच जोखिम बरकरार
इस मजबूत रिकवरी के बावजूद, महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। अमेरिका-ईरान संघर्ष अभी सुलझा नहीं है, और किसी भी तरह की नई वृद्धि तेल की कीमतों और बाज़ारों को अस्थिर कर सकती है। फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) भी टैरिफ और सप्लाई चेन की समस्याओं से उत्पन्न इनफ्लेशन पर नज़र रखे हुए है। अब निवेशक फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की आगामी बैठक और प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों की अर्निंग्स रिपोर्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो बाज़ार की दिशा तय करेंगी।
