'लो-हायर, लो-फायर' का दौर
यह 'लो-हायर, लो-फायर' (low-hire, low-fire) वाली स्थिति को दर्शाता है, जहां नई नौकरी मिलना मुश्किल हो रहा है, भले ही बेरोजगारी दर (unemployment rate) ऐतिहासिक रूप से कम बनी हुई है। इस स्थिति में, कंपनियां नए कर्मचारियों को नियुक्त करने और मौजूदा कर्मचारियों को निकालने में कम सक्रिय होती हैं।
लेबर मार्केट में आई सुस्ती: आंकड़े क्या कहते हैं?
दरअसल, 21 फरवरी को समाप्त हुए हफ्ते में शुरुआती बेरोजगारी लाभ के लिए किए गए दावों (initial jobless claims) में 4,000 की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 212,000 तक पहुंच गया। विश्लेषकों की उम्मीदों के अनुरूप यह मामूली वृद्धि है, लेकिन असली चिंता तो नौकरी सृजन के संशोधित आंकड़ों से जुड़ी है। सरकारी आंकड़ों में 2024-2025 के पेरोल (payroll) के आंकड़ों में भारी कटौती की गई है, जिससे पता चलता है कि पिछले साल केवल 181,000 नई नौकरियां पैदा हुईं। यह संख्या पहले बताए गए 584,000 का महज़ एक तिहाई है और 2020 के बाद से सबसे धीमी गति है।
गिरते जॉब ओपनिंग्स और ब्याज दरों का असर
इस बीच, नौकरी के अवसरों (job openings) में भी बड़ी गिरावट आई है। दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा गिरकर 6.5 मिलियन पर आ गया, जो कि दिसंबर 2017 के बाद सबसे निचला स्तर है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लगातार बनी हुई ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितता और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा 2022-2023 में बढ़ाए गए ऊंचे ब्याज दरों (interest rates) का असर हायरिंग पर दिख रहा है। टैरिफ (tariffs) के कारण भी बेरोजगारी दर 2026 के अंत तक करीब 0.3% अधिक रहने का अनुमान है।
आंकड़ों पर सवाल और बड़ी कंपनियों की छंटनी
आंकड़ों में इस भारी फेरबदल ने अमेरिकी श्रम बल के सही हाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) के हालिया बेंचमार्क संशोधनों ने पिछले अनुमानों से 1.03 मिलियन नौकरियां खत्म कर दी हैं, जिससे अर्थव्यवस्था की मजबूती की तस्वीर धुंधली हो गई है। 'बर्थ-डेथ मॉडल' (birth-death model) की भी आलोचना हो रही है, जो 'फैंटम जॉब्स' (phantom jobs) पैदा कर सकता है। इसके अलावा, UPS ने 2026 में 30,000 और 2025 में 48,000 नौकरियां खत्म करने का ऐलान किया है। Amazon और Washington Post जैसे बड़े नामों ने भी छंटनी (layoffs) की है, जिससे रोजगार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
भविष्य का अनुमान
आगे चलकर, 2026 की शुरुआत तक लेबर मार्केट के 'लो-हायर, लो-फायर' मोड में बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ विश्लेषक 2026 के मध्य तक हायरिंग में धीरे-धीरे सुधार की बात कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बेरोजगारी दर 4% के मध्य में स्थिर रहने का अनुमान है, लेकिन नई नौकरी ढूंढने में बढ़ रही मुश्किल यह साफ करती है कि श्रम बाजार में तेजी से रिकवरी की उम्मीद कम है।