US Jobs Data: लेबर मार्केट में मजबूती, पर ईरान टेंशन से महंगाई का अलर्ट!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
US Jobs Data: लेबर मार्केट में मजबूती, पर ईरान टेंशन से महंगाई का अलर्ट!
Overview

ईरान संघर्ष से बढ़े एनर्जी प्राइस और बढ़ती महंगाई का खतरा अमेरिकी इकोनॉमी के लिए चिंता का विषय बन गया है, भले ही लेबर मार्केट के आंकड़े फिलहाल कुछ हद तक स्थिरता दिखा रहे हों। कंटिन्यूइंग जॉबलेस क्लेम्स (continuing jobless claims) तो दो साल के निचले स्तर पर हैं, लेकिन इनिशियल क्लेम्स (initial claims) में बढ़ोतरी और 'K-shaped' इकोनॉमी के संकेत भविष्य की चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे हैं।

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लेबर मार्केट की तस्वीर: उम्मीदें और चुनौतियां

हालिया अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़े मजबूती दिखा रहे हैं, लेकिन यह स्थिरता थोड़ी नाजुक लग रही है। ऐसे लोग जो लंबे समय से बेरोजगार थे, उनकी संख्या कम हुई है। 28 मार्च को समाप्त सप्ताह के लिए डेटा के अनुसार, कंटिन्यूइंग जॉबलेस क्लेम्स (continuing jobless claims) 17.9 लाख थे, जो लगभग दो साल में सबसे कम हैं। यह दर्शाता है कि नौकरी गंवाने वाले लोग जल्दी ही नई नौकरी ढूंढ रहे हैं।

इसके अलावा, मार्च के नॉनफार्म पेरोल्स (nonfarm payrolls) में 178,000 की बढ़ोतरी का अनुमान था, जो उम्मीदों से बेहतर रहा, और अनएंप्लॉयमेंट रेट (unemployment rate) 4.3% पर बना रहा। हालांकि, 4 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के लिए इनिशियल क्लेम्स (initial claims), जो भविष्य का संकेत देते हैं, बढ़कर 219,000 हो गए हैं। यह बताता है कि अब ज्यादा छंटनी (layoffs) हो सकती है।

जियोपॉलिटिक्स और महंगाई का डबल अटैक

लेबर मार्केट इन सब के बीच बड़े जियोपॉलिटिकल और इन्फ्लेशन के दबावों का सामना कर रहा है। ईरान संघर्ष ने ब्रेंट क्रूड (Brent crude) ऑयल की कीमतों को $111 प्रति बैरल के करीब पहुंचा दिया है। मार्च के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी महंगाई दर के सालाना 3.3% तक पहुंचने का अनुमान है, जो मई 2024 के बाद सबसे ज्यादा होगी।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एनर्जी की ऊंची कीमतों का असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा, जिससे दूसरे सामानों और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ेंगी। इससे फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम हो सकती है। ग्लोबल स्तर पर भी हायरिंग कमजोर बनी हुई है, और एडवांस इकोनॉमी में प्री-पैंडेमिक लेवल से काफी नौकरियां घटी हैं।

बिजनेस हुए सतर्क, 'K-shaped' इकोनॉमी का डर

लगातार जॉबलेस क्लेम्स की स्थिरता के बावजूद, कई जोखिम सामने आ रहे हैं। इनिशियल क्लेम्स में वृद्धि से पता चलता है कि जियोपॉलिटिकल जोखिमों और एनर्जी प्राइस शॉक के चलते बिजनेस हायरिंग को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं। ईरान युद्ध ने न केवल फ्यूल की लागत बढ़ाई है, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन को भी बाधित किया है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष जारी रहता है, तो ग्लोबल ग्रोथ धीमी हो सकती है और अमेरिका मंदी (recession) की ओर बढ़ सकता है। एनर्जी की वजह से बढ़ती महंगाई फेडरल रिजर्व की रणनीति को और जटिल बना सकती है। इसके अलावा, अमीर और गरीब परिवारों के बीच खर्च करने की क्षमता का बढ़ता अंतर, जिसे 'K-shaped' इकोनॉमी कहा जाता है, भी एक बड़ी कमजोरी है। सर्विसेज सेक्टर में ISM एम्प्लॉयमेंट कंपोनेंट (ISM employment component) का 45.2 तक गिरना, चिंताएं बढ़ा रहा है।

आगे क्या? फेड की नजर महंगाई पर

हालांकि हाल के आंकड़ों में कुछ मजबूती दिखी है, लेकिन विश्लेषकों को बाजार में अस्थिरता (volatility) जारी रहने की उम्मीद है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और महंगाई के आंकड़ों व जियोपॉलिटिकल घटनाओं पर बारीकी से नजर रखेगा। आने वाली कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट एनर्जी प्राइस में बढ़ोतरी के संकेतों पर खास ध्यान देगी।

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