लेबर मार्केट में 50 साल का सबसे निचला स्तर
ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका का लेबर मार्केट (Labor Market) कमाल का लचीला है। बेरोज़गारी भत्ते के लिए इनिशियल क्लेम (Initial Claims) ऐसे स्तर पर आ गए हैं, जो पिछले पांच दशकों में नहीं देखे गए। यह मजबूती फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) फैसलों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।
महंगाई के बीच फेड रिजर्व ने रोके रेट कट
बीते हफ्ते 25 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में, इनिशियल क्लेम 26,000 घटकर 189,000 पर पहुंच गए। यह विश्लेषकों के 214,000 के अनुमान से काफी कम है और सितंबर 1969 के बाद सबसे निचला स्तर है। लगातार आने वाले क्लेम (Continuing Claims) में भी गिरावट देखी गई, जो छंटनी (Layoffs) की कम दर की ओर इशारा करता है। इस मज़बूत लेबर मार्केट को देखते हुए ही फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) ने अप्रैल की मीटिंग में ब्याज दरों (Interest Rates) को स्थिर रखने का फैसला किया। फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार अपनी फेडरल फंड्स रेट (Federal Funds Rate) को 3.5% से 3.75% के बीच बनाए रखा है, जो केंद्रीय बैंक के सतर्क रवैये को दर्शाता है।
GDP ग्रोथ अच्छी, पर महंगाई हावी
दूसरी ओर, अमेरिकी अर्थव्यवस्था (US Economy) ने पहली तिमाही 2026 में 2.0% की सालाना दर से ग्रोथ दर्ज की, जो पिछली तिमाही के 0.5% से काफी अच्छी है। इस ग्रोथ में निवेश, एक्सपोर्ट्स और सरकारी खर्च का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, महंगाई (Inflation) अब भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। ग्रॉस डोमेस्टिक परचेज (Gross Domestic Purchases) के लिए प्राइस इंडेक्स 3.6% बढ़ा, और PCE प्राइस इंडेक्स तो 4.5% तक चढ़ गया। ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी को भी महंगाई बढ़ने की एक वजह माना जा रहा है, जिसने फेड के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कंपनियों की छंटनी और लेबर मार्केट का विरोधाभास
यह समझना ज़रूरी है कि Meta Platforms और Nike जैसी बड़ी कंपनियों ने कुछ छंटनी (Layoffs) की घोषणा की है। लेकिन ये फैसले कंपनी के अंदरूनी पुनर्गठन (Restructuring) और AI में निवेश की वजह से लिए गए हैं, न कि लेबर मार्केट में कोई व्यापक कमजोरी आने के कारण। Meta AI पर भारी निवेश के लिए अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही है, जिसके लिए $135 बिलियन तक का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) अनुमानित है। वहीं, Nike अपनी टेक्नोलॉजी यूनिट में 1,400 लोगों को हटा रही है ताकि एफिशिएंसी (Efficiency) बढ़ाई जा सके। ये कंपनी-विशिष्ट कदम, समूचे लेबर मार्केट की मजबूती के बिल्कुल उलट हैं।
छिपे खतरे और बदलती बाज़ार की सोच
हालांकि, लेबर मार्केट में कुल मिलाकर मजबूती दिख रही है, लेकिन कुछ छिपे हुए खतरे भी हैं, जैसे लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (Labor Force Participation Rate) का धीमा होना। फेडरल रिजर्व भी मानता है कि महंगाई के साथ-साथ लेबर मार्केट में जोखिम मौजूद हैं। AI में हो रहा भारी निवेश भविष्य में नौकरियों पर असर डाल सकता है। Nike जैसी कंपनियों के स्ट्रक्चरिंग फैसले मार्जिन पर दबाव और बाज़ार की चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। मौजूदा आर्थिक माहौल, जिसमें ऊर्जा झटके और भू-राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ी महंगाई है, फेड के लिए रास्ता मुश्किल बना रहा है। ऐसी आशंका है कि stagflation (जहां महंगाई के साथ मंदी या कमजोर नौकरी बाजार हो) की स्थिति बन सकती है। फेडरल रिजर्व डेटा पर निर्भर अपनी रणनीति के कारण नीतिगत गलतियां कर सकता है, अगर महंगाई और मज़बूत हुई या अलग-अलग सेक्टर्स में कमजोरी आई।
आगे की राह: पॉलिसी का अनिश्चित भविष्य
फेडरल रिजर्व के अधिकारी फिलहाल ब्याज दरों को लंबे समय तक स्थिर रखने के पक्ष में हैं। उम्मीद है कि अगली बड़ी नीतिगत बदलाव 2027 तक टल सकता है, और यह दर में बढ़ोतरी भी हो सकती है। भू-राजनीतिक झटके, कमोडिटी की अस्थिर कीमतें और लगातार बनी हुई महंगाई के चलते बाज़ार की उम्मीदें कम हो रही हैं कि ब्याज दरें जल्द घटाई जाएंगी। ऐसे में, यह संकेत मिल रहा है कि ऊंची ब्याज दरें या अप्रत्याशित नीतिगत बदलावों का दौर लंबा खिंच सकता है।
