US-Iran तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
US-Iran तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम!
Overview

West Asia में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 8 मई 2026 को भारी गिरावट दर्ज की गई। Sensex और Nifty दोनों ही लाल निशान पर बंद हुए, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब कॉरपोरेट नतीजे (Corporate Earnings) अच्छे आ रहे थे और भारत की इकोनॉमिक आउटलुक भी मजबूत दिख रही थी।

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जियोपॉलिटिकल टेंशन का सीधा वार

शेयर बाजार की चाल को इस बार घरेलू आर्थिक कारकों से ज्यादा ग्लोबल इवेंट्स ने प्रभावित किया। बाजार का सेंटीमेंट (Sentiment) तेजी से बदला, यह दिखाता है कि बाहरी जोखिम (External Risks) इस वक्त कंपनियों के नतीजों और देश की आर्थिक ग्रोथ पर भारी पड़ रहे हैं।

बाजार सूचकांकों में बड़ी गिरावट

भारतीय इक्विटी सूचकांकों, Sensex और Nifty 50, में शुक्रवार, 8 मई 2026 को भारी गिरावट आई। Sensex 516.33 अंक गिरकर 77,328.19 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 150.50 अंक लुढ़ककर 24,176.15 पर आ गया। इस व्यापक गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव था, जिसने इस क्षेत्र की स्थिरता और तेल आपूर्ति (Oil Supply) को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

बाजार में वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ी, इंडिया VIX (India VIX) करीब 2% बढ़कर 16.92 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती घबराहट का संकेत है। हालांकि, स्मॉल-कैप (Small-cap) जैसे ब्रॉडर मार्केट सेगमेंट ने कुछ मजबूती दिखाई और बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। बैंकिंग (Banking) और फाइनेंशियल (Financial) स्टॉक्स पर दबाव देखा गया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नतीजे उम्मीद से कमजोर आने के बाद शेयर में बड़ी गिरावट आई। वहीं, जियोपॉलिटिकल चिंताओं के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें बढ़ीं।

ऐतिहासिक संकेत और आर्थिक असर

हालांकि जियोपॉलिटिक्स इस बार का तात्कालिक कारण था, लेकिन भारतीय बाजार पहले भी बाहरी कारकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखा चुके हैं। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे ही जियोपॉलिटिकल टेंशन के दौरान Sensex 412 अंक गिरा था। यह इतिहास बताता है कि बाहरी संघर्ष और संभावित तेल कीमतों में उछाल जैसे आर्थिक प्रभाव भारतीय शेयरों को नियमित रूप से प्रभावित करते हैं। इस बार के तनाव के चलते ग्लोबल मार्केट में भी हलचल दिखी, यूएस इक्विटी (US Equities) में गिरावट आई और एशियन मार्केट्स रिकॉर्ड ऊंचाई से पीछे हटे।

व्यापक अर्थव्यवस्था (Wider Economy) पर भी असर दिखेगा। वेस्ट एशिया संकट के कारण तेल की कीमतों में उछाल और करेंसी (Currency) की अस्थिरता को देखते हुए, चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए भारत की GDP ग्रोथ फोरकास्ट (GDP Growth Forecast) घटकर 6.6% रह सकती है। महंगाई (Inflation) भी एक चिंता का विषय है, जिसके अप्रैल में ईंधन लागत (Fuel Costs) बढ़ने के कारण 3.8% तक पहुंचने की उम्मीद है। इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती और डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) के मजबूत इनफ्लो (Inflow) ने कुछ सहारा दिया। एनालिस्ट्स (Analysts) ने 'बाय-ऑन-डिप' (Buy-on-Dip) की रणनीति की सलाह दी है।

बाहरी झटकों के प्रति भेद्यता

इस बिकवाली ने भारतीय बाजार की बाहरी जियोपॉलिटिकल झटकों के प्रति भेद्यता (Vulnerability) को उजागर किया है। US-Iran तनाव सीधे तौर पर एनर्जी सप्लाई चेन (Energy Supply Chain) को खतरे में डालता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) चौड़ा होगा और रुपये पर दबाव बढ़ेगा, जो पहले ही 94-96 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इस तरह के दबाव से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए पॉलिसी को लेकर दुविधा पैदा हो सकती है, हालांकि ज्यादातर इकोनॉमिस्ट 2027 तक ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद कर रहे हैं।

एनालिस्ट्स का नजरिया

एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर Nifty 24,200 के ऊपर बना रहता है, तो यह 25,000 के स्तर को छू सकता है। मुख्य सपोर्ट लेवल्स 24,228 के आसपास देखे जा रहे हैं। बाजार की दिशा जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और आने वाले इकोनॉमिक डेटा (Economic Data) पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.