अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने के संघर्ष को खत्म करने वाले शांति समझौते से भारत को बड़ी राहत मिलने वाली है। एक्सपोर्टर्स पश्चिम एशिया के साथ व्यापार में भारी बढ़ोतरी, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और रुपये में स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। स्विट्जरलैंड में 19 जून को हस्ताक्षर होने वाले इस समझौते से भारत का इंपोर्ट बिल घटेगा, महंगाई पर लगाम लगेगी और व्यापार का माहौल बेहतर होगा, जिससे देश के आर्थिक विकास को रफ्तार मिल सकती है।
एक्सपोर्ट्स में बड़े उछाल की उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने के संघर्ष को खत्म करने वाले शांति समझौते से भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर में नई जान आने की उम्मीद है। इस संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया के साथ व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था, जो भारत के लिए ऊर्जा आयात का एक महत्वपूर्ण जरिया और उसके सामानों का एक बड़ा बाजार है। विशेषज्ञों और एक्सपोर्टर्स को भरोसा है कि हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने से न केवल भारत की आयात लागत कम होगी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिलेगा और भारतीय रुपया स्थिर होगा।
भारत को मिलेगी आर्थिक राहत
यह संघर्ष भारत की पश्चिम एशिया पर कच्चे तेल के लगभग 50%, एलपीजी के 70% और एलएनजी के करीब 90% आयात के लिए भारी निर्भरता को उजागर करता है। ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में आई रुकावटों के कारण ऊर्जा आयात बिल बढ़ गया था, महंगाई का खतरा बढ़ गया था और रुपया कमजोर हो गया था, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को महंगी वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की तलाश करनी पड़ी थी। आर्थिक थिंक-टैंक GTRI का कहना है कि यह शांति समझौता ऊर्जा बाजारों को स्थिर करके, तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित करके और भारत की विकास संभावनाओं में सुधार करके तत्काल राहत प्रदान करेगा।
व्यापार में सामान्य स्थिति बहाल होगी
टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज इंडिया के फाउंडर चेयरमैन, शरद कुमार सराफ ने कहा कि संघर्ष की समाप्ति से व्यापार अनिश्चितताएं और आर्थिक मंदी खत्म हो जाएगी। उनका मानना है कि इससे भारत के एक्सपोर्ट्स में भारी बढ़ोतरी होगी और नए व्यावसायिक अवसर खुलेंगे, जो अगले दो से तीन वर्षों में भारत को 'विकसित भारत' बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के प्रेसिडेंट, एस सी रालहान ने भी इन बातों का समर्थन करते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में सामान्य स्थिति बहाल होगी, कीमतें नियंत्रित होंगी और व्यापार व आर्थिक विस्तार के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनेगा।
व्यापार पर असर और आंकड़े
28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष ने यूएई, ओमान, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। मार्च में, भारत के समग्र एक्सपोर्ट्स में पिछले पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, जो 7.44% घटकर $38.92 बिलियन रह गया। मध्य पूर्व में एक्सपोर्ट्स विशेष रूप से 57.95% घटकर $3.5 बिलियन रह गए, जबकि खाड़ी देशों से आयात 51.64% कम होकर $51.64% पर आ गया। सामान्य तौर पर, इस क्षेत्र में भारत का मासिक निर्यात लगभग $6 बिलियन तक पहुंचता है। वित्तीय वर्ष 25 में GCC देशों के साथ व्यापार में सामान्य वृद्धि के बावजूद, मार्च के विशिष्ट निर्यात आंकड़े संघर्ष से हुए तत्काल नुकसान को दर्शाते हैं।
