बाज़ारों को मिली राहत, तेल हुआ सस्ता
इस सीज़फायर की घोषणा 8 अप्रैल को हुई, जिसके तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 12% से ज़्यादा गिरकर करीब $95 प्रति बैरल पर आ गईं। इस भू-राजनीतिक तनाव में कमी (Geopolitical De-escalation) ने भारतीय रुपये और एशियाई बाज़ारों को ज़बरदस्त सहारा दिया है।
रुपये का आउटलुक: चुनौतियाँ बरकरार
हालांकि, सीज़फायर से भारतीय रुपये को फौरी राहत मिली है, लेकिन फॉरेक्स डीलर्स (Forex Dealers) रुपये के तेज़ी से मजबूत होने को लेकर सतर्क हैं। उनका कहना है कि रुपये को ₹90 प्रति डॉलर के स्तर पर वापस लाने के लिए भारी मात्रा में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) इनफ्लो और आर्थिक हालातों में बड़े बदलाव की ज़रूरत होगी। पहले के तनाव के दौरान रुपया 4.5% तक गिर गया था, जो फाइनेंशियल ईयर 26 (Financial Year 26) में एशिया की सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करेंसी बन गई थी।
RBI का दखल और नए नियम
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रुपये को स्थिर करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। हालिया उपायों में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन (Net Open Position) को $100 मिलियन तक सीमित करना और सट्टा (Speculative) दुरुपयोग को रोकने के लिए नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) कॉन्ट्रैक्ट्स पर रोक लगाना शामिल है। केंद्रीय बैंक ने कैंसल्ड फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (Foreign Exchange Derivative Contracts) को फिर से बुक करने पर भी पाबंदी लगा दी थी।
सीज़फायर की शर्तें
यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के मुताबिक, सीज़फायर की एक अहम शर्त स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करना है, जो ऊर्जा के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। वहीं, बड़े समझौते की दिशा में बातचीत के लिए इज़राइल (Israel) दो हफ़्ते के लिए अपनी बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है।