ऊर्जा की कीमतों में उछाल से बढ़ी अमेरिका की महंगाई
मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने मार्च महीने की महंगाई को 3.3% के स्तर पर पहुंचा दिया है. यह आंकड़ा फरवरी के 2.4% से काफी ज्यादा है और निवेशकों की चिंताएं बढ़ा रहा है.
मार्च में महंगाई के आंकड़े क्या कहते हैं?
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) मार्च में पिछले महीने की तुलना में 0.9% बढ़ा, जिससे सालाना महंगाई दर 3.3% पर जा पहुंची. इस उछाल का सबसे बड़ा कारण पेट्रोल के दामों में 21.2% की खतरनाक बढ़ोतरी रही. यह 1967 के बाद पेट्रोल की कीमतों में सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है.
भू-राजनीतिक तनाव और तेल सप्लाई पर असर
यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर ईरान संघर्ष (Iran conflict) और हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास जारी तनाव से जुड़ी है. इस अनिश्चितता ने वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. इसी के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $95.09 प्रति बैरल के आसपास और WTI फ्यूचर्स (WTI futures) $98 के करीब कारोबार कर रहे हैं. आम तौर पर रिटेल पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर करीब $3.64 प्रति गैलन हो गई है, जो फरवरी के बाद से 25.1% ज्यादा है.
शेयर बाजारों पर तत्काल प्रतिक्रिया
शुरुआत में, अमेरिकी शेयर बाजारों, जैसे Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq Composite में 0.3% के आसपास की मामूली बढ़त देखी गई. यह शुरुआती प्रतिक्रिया महंगाई के आंकड़ों के उम्मीदों के मुताबिक रहने से आई थी. हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में लगातार वृद्धि की आशंकाओं को देखते हुए यह उत्साह शायद लंबे समय तक न टिक पाए.
एनर्जी सेक्टर की धूम और बाजार का वैल्यूएशन
इस माहौल में, एनर्जी सेक्टर (Energy sector) में जोरदार तेजी देखी जा रही है. iShares U.S. Energy ETF (IYE) साल की शुरुआत से अब तक 34.78% चढ़ चुका है, जबकि Energy Select Sector Index भी फरवरी तक 19.8% बढ़ा है. इसकी तुलना में, Dow Jones का P/E ratio लगभग 22.84, Nasdaq का 26.99, और S&P 500 का फॉरवर्ड P/E करीब 20x के आसपास है, जो एनर्जी सेक्टर की तुलना में कम आकर्षक लग सकता है.
IMF और S&P की क्या हैं भविष्यवाणियां?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 3.1% रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन यह भी कहा है कि अमेरिका की महंगाई लक्ष्य से ऊपर रहेगी. S&P ग्लोबल रेटिंग्स का अनुमान है कि 2026 में अमेरिकी GDP ग्रोथ 2.2% के आसपास रह सकती है, जिसमें तेल की कीमतों के अस्थायी झटके को भी ध्यान में रखा गया है.
उपभोक्ताओं पर असर और आगे का रास्ता
बढ़ती पेट्रोल की कीमतें, खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए, एक टैक्स की तरह काम कर सकती हैं. इससे दूसरे सामानों पर उनका खर्च कम हो सकता है और आर्थिक रिकवरी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. ईरान और उसके पड़ोसियों से जुड़ी खबरें, हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान, और सऊदी अरब की तेल उत्पादन क्षमता में आई कमी, ये सभी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर रही हैं.
Outlook: अनिश्चितता और सतर्कता
आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक ईरान संघर्ष के बढ़ने या घटने और तेल की कीमतों पर इसके असर पर निर्भर करेगी. IMF का मानना है कि 2026 में अमेरिका की महंगाई बढ़ी रह सकती है. S&P ग्लोबल रेटिंग्स 2026 के अंत तक ब्याज दरों में कटौती की संभावना जता रहा है, लेकिन यह महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक विकास पर निर्भर करेगा. कुल मिलाकर, मौजूदा माहौल में निवेशकों को भू-राजनीतिक घटनाओं, कमोडिटी की कीमतों और महंगाई पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दी जाती है.