यह डील भारत के एक्सपोर्टर्स (Exporters) के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। अमेरिकी सरकार ने भारत से आने वाले गुड्स (Goods) पर लगाए टैरिफ (Tariff) को फौरन 25% से घटाकर 18% कर दिया है। यह पिछले एक साल से चले आ रहे ट्रेड डिस्प्यूट्स (Trade Disputes) का सुखद अंत है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स (Industry Experts) का मानना है कि इस फैसले से भारतीय टेक्सटाइल (Textile) और लेदर (Leather) जैसे सेक्टर्स को सीधे तौर पर फायदा होगा, जो पहले अमेरिका के भारी टैरिफ के कारण मुश्किल में थे। इस सकारात्मक खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा, जहां GIFT Nifty में लगभग 800 पॉइंट्स की जोरदार तेजी दर्ज की गई।
इस नए एग्रीमेंट (Agreement) के तहत, भारत अमेरिकी प्रोडक्ट्स (Products) की खरीद बढ़ाएगा। यह डील एनर्जी (Energy), टेक्नोलॉजी (Technology), एग्रीकल्चर (Agriculture) और कोल (Coal) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में $500 बिलियन से अधिक की अमेरिकी खरीद को सुनिश्चित करती है। इस समझौते का एक अहम जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) मोड़ भी है: भारत अब रूस से तेल (Oil) की खरीद बंद कर देगा। इसके बदले, नई दिल्ली संभवतः अमेरिका और वेनेजुएला (Venezuela) से तेल मंगाएगी। यह रूस से एनर्जी इंपोर्ट (Energy Import) को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप है। गौरतलब है कि पहले 25% का वह टैरिफ, जो भारत के रूस से लगातार तेल आयात का एक कारण था, अब इस नए समझौते का हिस्सा बनकर खत्म हो गया है।
बता दें कि यह ऐतिहासिक समाधान 2025 के दौरान दोनों देशों के बीच बड़े ट्रेड वॉर (Trade War) के बाद आया है। शुरुआत में, अमेरिका ने अपने ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को कम करने के लिए अप्रैल 2025 में सभी इम्पोर्ट्स (Imports) पर 10% का बेसलाइन टैरिफ लगाया था। इसके जवाब में, भारत पर 26% तक के जवाबी टैरिफ लगाए गए, और बाद में यह 50% के पार पहुंच गया। इन कठोर उपायों को अमेरिकी प्रशासन ने भारत की व्यापारिक नीतियों और रूस से तेल खरीदने की उसकी मंशा पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया था। इन टैरिफ्स ने भारत के लगभग 70% एक्सपोर्ट्स (Exports) को खतरे में डाल दिया था और देश की GDP ग्रोथ (GDP Growth) के अनुमानों को भी नीचे खींच लिया था।
दोनों देशों के लीडर्स (Leaders) ने इस डील को सिर्फ टैरिफ एडजस्टमेंट (Tariff Adjustment) से कहीं बड़ा बताया है। यह एक 'रीसेट' (Reset) है जिसका मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग (Economic Cooperation) को बढ़ाना और उनकी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (Strategic Partnership) को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स (Made in India Products) पर अब 18% का टैरिफ लगेगा।' वहीं, प्रेसिडेंट ट्रम्प ने भी कहा कि यह डील दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों का द्वार खोलेगी। इकोनॉमिस्ट्स (Economists) का मानना है कि इस डील से भारत पर इम्पोर्ट्स को लेकर जो असामान्य दबाव था, वह कम होगा और यह भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में एक अहम भूमिका निभाने में मदद कर सकता है।