US-India Trade Deal: अमेरिका-भारत में ऐतिहासिक समझौता, कम हुए टैरिफ, तेल के खेल में बड़ा मोड़!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
US-India Trade Deal: अमेरिका-भारत में ऐतिहासिक समझौता, कम हुए टैरिफ, तेल के खेल में बड़ा मोड़!
Overview

महीनों की लंबी बातचीत के बाद, अमेरिका और भारत ने एक बड़ा व्यापारिक समझौता कर लिया है। इस डील के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले अपने टैरिफ (tariff) को **25%** से घटाकर **18%** कर रहा है, और भारत भी अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर अपने टैरिफ खत्म कर देगा। इस समझौते को भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद कम करने की प्रतिबद्धता से भी जोड़ा जा रहा है, और भारत अमेरिका से **$500 अरब** से ज़्यादा के प्रोडक्ट्स खरीदेगा।

यह समझौता सिर्फ टैरिफ कम करने से कहीं ज़्यादा है, यह दोनों देशों के बीच आर्थिक और भू-राजनीतिक संबंधों में एक बड़ा बदलाव लाता है। सबसे अहम बात यह है कि इस डील का सीधा संबंध भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद कम करने से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूस से तेल खरीदना घटाएगा, जिसे अमेरिका चाहता रहा है। रूस भारत का एक बड़ा तेल सप्लायर रहा है, जिसका हिस्सा 40% तक पहुंच गया था। हालांकि, रूस पर लगे प्रतिबंधों और वैश्विक तेल कीमतों के स्थिर होने से अब डिस्काउंटेड रूसी तेल का आकर्षण कम हो गया है। अमेरिका या अन्य स्रोतों से तेल खरीदने पर भारत का सालाना फ्यूल इम्पोर्ट बिल अरबों डॉलर बढ़ सकता है, जो प्रति बैरल 5-10% तक महंगा हो सकता है। यह एनर्जी ट्रेड का नया समीकरण वैश्विक बाजार को भी प्रभावित करेगा।

टैरिफ में बड़ी राहत और बाजार तक पहुंच

इस डील के तहत, भारत अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए सभी तरह के टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को पूरी तरह खत्म कर देगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी सामानों को भारत में अब जीरो-टैरिफ पर एंट्री मिलेगी। यह राहत तब आई है जब हाल ही में अमेरिका ने भारत पर, खासकर रूस से तेल खरीदने के कारण, 50% तक टैरिफ बढ़ा दिए थे। 2024 में अमेरिका का भारत के साथ गुड्स ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) $45.8 अरब डॉलर था। यह समझौता इस व्यापारिक रिश्ते को संतुलित करने और अमेरिकी एक्सपोर्टर्स के लिए बाजार को खोलने में मदद करेगा।

'BUY AMERICAN' पहल और सेक्टरों को बूस्ट

इस समझौते का एक बड़ा हिस्सा भारत द्वारा अमेरिका से $500 अरब डॉलर से ज़्यादा के प्रोडक्ट्स खरीदने का वादा है। इसमें अमेरिकी एनर्जी, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर और कोल सेक्टर में बड़ा निवेश शामिल है। यह 'BUY AMERICAN' पहल को बड़ी मजबूती देगा और अमेरिका के इन सेक्टर्स के लिए उम्मीद जगाता है। इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भी बाजार में बेहतर पहुंच की उम्मीद है, हालांकि कुछ कृषि टैरिफ पर बातचीत एक मुश्किल मुद्दा रही है।

वैश्विक परिदृश्य और कूटनीतिक गर्मी

यह ट्रेड डील ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर के देश अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। हाल ही में, भारत ने यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ भी 27 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता किया था। भारत पहले अमेरिकी टैरिफ के जवाब में अपने एक्सपोर्ट मार्केट को विविधीकृत (diversify) करने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की हालिया नियुक्ति ने भी इस कूटनीतिक मोमेंटम को बढ़ाया है। हालांकि अमेरिका पहले व्यापार असंतुलन और रूस से भारत के ऊर्जा सौदों के कारण टैरिफ लगाता रहा था, लेकिन यह समझौता तनाव कम करने का संकेत है। अनुमान है कि 2026 तक भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जिससे उसे ऐसे समझौतों में मोलभाव करने की ताकत मिलेगी।

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