अमेरिका ने ब्राजील से आने वाले ज्यादातर सामानों पर **25%** टैरिफ लगा दिया है। यह कदम ट्रेड पॉलिसी में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, जिसका असर भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका का बड़ा कदम
अमेरिका ने ब्राजील से आयात होने वाले हजारों उत्पादों पर 25% का टैरिफ (Tariff) लगा दिया है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के मुताबिक, यह फैसला US ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत व्यापारिक प्रथाओं की जांच के बाद लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इंडस्ट्रियल ओवरकैपेसिटी और सप्लाई चेन लेबर स्टैंडर्ड्स को लेकर चिंताएं इस आक्रामक नीति बदलाव की मुख्य वजह हैं।
ग्लोबल ट्रेड पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की भारत, चीन और यूरोपियन यूनियन जैसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स के प्रति नीति का एक खाका हो सकता है। टैरिफ की मार एग्रीकल्चरल मशीनरी, स्टील, शुगर और कपड़ों जैसे हजारों सामानों पर पड़ेगी। हालांकि, अमेरिका ने कॉफी, बीफ, एनर्जी प्रोडक्ट्स, रेयर अर्थ्स और एयरक्राफ्ट कंपोनेंट्स जैसे जरूरी सामानों को इससे छूट दी है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि सप्लाई चेन प्रैक्टिसेज की आगे की जांचों से 12.5% का अतिरिक्त टैरिफ लग सकता है, जिससे कुल ड्यूटी 37.5% तक पहुंच सकती है।
ब्राजील का रुख और भविष्य के रिस्क
वहीं, ब्राजील की सरकार ने इन उपायों को सिरे से खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने ब्राजील के रेसिप्रोसिटी लॉ (Reciprocity Law) के तहत कार्रवाई करने की पुष्टि की है और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में भी इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी है।
निवेशकों के लिए चिंता का विषय सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार पर तत्काल प्रभाव नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल कॉमर्स के लिए एक मिसाल भी है। अगर अमेरिका ऐसे ही सख्त नेगोशिएशन टैक्टिक्स का इस्तेमाल करता रहा, तो अमेरिकी एक्सपोर्ट मार्केट पर निर्भर देश बढ़ी हुई वोलेटिलिटी का सामना कर सकते हैं। ग्लोबल इंडस्ट्रीज के लिए सप्लाई चेन में बाधा, इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और रॉ मैटेरियल्स व तैयार माल की डिमांड पैटर्न में बदलाव का जोखिम है। WTO विवाद के नतीजों और अमेरिका की अन्य ट्रेडिंग पार्टनर्स के बारे में नई पॉलिसी घोषणाओं पर नजर रखना, लॉन्ग-टर्म ग्लोबल ट्रेड स्टेबिलिटी का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
