अमेरिका ने भारत के कुछ चुनिंदा सामानों पर **10%** का एडिशनल इम्पोर्ट ड्यूटी (Additional Import Duty) लगाने का ऐलान किया है। हालांकि, फार्मा और स्मार्टफोन जैसे **$87.31 अरब** के एक्सपोर्ट को इस दायरे से बाहर रखा गया है। भारत सरकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) के जरिए बेहतर शर्तों के लिए बातचीत कर रही है।
Detailed Coverage
अमेरिका का बड़ा फैसला: भारत पर 10% एडिशनल ड्यूटी
अमेरिका के ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव (Trade Representative) ने सेक्शन 301 (Section 301) के तहत भारत से आने वाले कुछ खास सामानों पर 10% का अतिरिक्त इम्पोर्ट ड्यूटी लगाने की घोषणा कर दी है। यह फैसला कई तरह की औद्योगिक प्रथाओं पर जांच के बाद लिया गया है। भारतीय कंपनियों के लिए यह एक मिली-जुली खबर है, क्योंकि जिन दूसरे देशों पर अमेरिका जांच कर रहा है, उनकी तुलना में भारत पर लगी टैरिफ दरें अभी भी कम हैं।
किन सेक्टर्स को मिली राहत?
भारतीय निवेशकों और निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि $87.31 अरब (वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुमान के अनुसार) के एक्सपोर्ट को इस 10% की ड्यूटी से बाहर रखा गया है। इनमें जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स (Generic Pharmaceuticals) और स्मार्टफोन जैसे बड़े रेवेन्यू वाले प्रोडक्ट्स शामिल हैं, जिन पर अभी भी कोई अतिरिक्त ड्यूटी नहीं लगेगी। साथ ही, स्टील, एल्युमीनियम और कुछ ऑटो कंपोनेंट्स जैसे प्रोडक्ट्स, जो पहले से ही अमेरिका के सेक्शन 232 (Section 232) ट्रेड नियमों के तहत आते हैं, वे भी इस नए 10% टैक्स से अछूते रहेंगे।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर असर
हालांकि, टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए स्थिति थोड़ी मुश्किल हो सकती है। बांग्लादेश, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के मुकाबले, भारत अभी तक विशेष टैरिफ-रेट कोटा (Tariff-Rate Quota) छूट हासिल नहीं कर पाया है। ये छूट अमेरिकी कॉटन से बने कपड़ों पर तरजीही ड्यूटी रेट की अनुमति देती हैं। अमेरिका में भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल का सालाना बाजार लगभग $11 अरब का है, और इस अंतर के कारण भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है। एनालिस्ट्स इस पर नज़र रख रहे हैं कि क्या इससे ग्लोबल खरीदार उन देशों की ओर रुख करेंगे जिन्हें फिलहाल ये खास कोटा बेनिफिट्स मिल रहे हैं।
ट्रेड नेगोशिएशन की अहमियत
भारतीय सरकार इस समय चल रही इंडिया-यूएस बायलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (India-U.S. Bilateral Trade Agreement) की बातचीत के जरिए इन व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रही है। एक फाइनल एग्रीमेंट पर पहुंचना भारत के व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाने और भारतीय सामानों को ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की कुंजी है। अमेरिकी सरकार ने भारत की हालिया फॉरेन ट्रेड पॉलिसी (Foreign Trade Policy) में हुए बदलावों को भी स्वीकार किया है, जिसमें अब जबरन श्रम (Forced Labor) से बने सामानों का इम्पोर्ट प्रतिबंधित है। यह भी एक वजह है जिसके कारण टैरिफ के अंतिम स्तर पर यह फैसला लिया गया।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
जिन कंपनियों के एक्सपोर्ट्स वर्तमान छूट सूची से बाहर हैं, उन पर तत्काल वित्तीय प्रभाव सीमित रहेगा। निवेशकों को बायलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कोई भी बड़ी सफलता एक्सपोर्ट लागत को स्थिर कर सकती है और प्रभावित सेक्टर्स के मार्जिन में सुधार कर सकती है। इसके अलावा, टैरिफ-रेट कोटा के अभाव के बावजूद टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स की अमेरिकी बाजार में एक्सपोर्ट वॉल्यूम बनाए रखने की क्षमता, आने वाली क्वार्टरली अर्निंग्स (Quarterly Earnings) में शेयरधारकों के लिए निगरानी का एक प्रमुख क्षेत्र रहेगी।
