US का बड़ा झटका! भारत पर लगा 10% इंपोर्ट ड्यूटी, FIEO ने कहा - ज़्यादा चिंता की बात नहीं

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AuthorMehul Desai|Published at:
US का बड़ा झटका! भारत पर लगा 10% इंपोर्ट ड्यूटी, FIEO ने कहा - ज़्यादा चिंता की बात नहीं

अमेरिकी सरकार ने भारत सहित 15 देशों से आने वाले सामानों पर **10%** इंपोर्ट ड्यूटी लगा दी है। लेबर प्रैक्टिस को लेकर अमेरिका की ये पहल भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए लागत बढ़ाएगी, लेकिन FIEO का कहना है कि भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (competitiveness) ज़्यादा प्रभावित नहीं होगी, क्योंकि कई बड़े प्रतिद्वंद्वी देशों पर इससे भी ज़्यादा ड्यूटी लगाई गई है।

Detailed Coverage

लेबर प्रैक्टिस पर अमेरिका की सख्ती

अमेरिकी सरकार ने अपने एक नए फैसले में भारत और 15 अन्य देशों से आयात (import) किए जाने वाले उत्पादों पर 10% का टैरिफ (tariff) लागू कर दिया है। इस कदम का मकसद वैश्विक सप्लाई चेन में लेबर प्रैक्टिस को सुधारना है। इस नई ड्यूटी की वजह से अमेरिकी बाज़ार में भारतीय सामानों की लैंडेड कॉस्ट (landed cost) यानी खरीदार तक पहुंचने की कुल लागत बढ़ जाएगी।

FIEO की तरफ से राहत

हालांकि, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (FIEO) ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत पर लगी 10% की ड्यूटी कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है। FIEO के प्रेसिडेंट एस सी रालहन ने बताया कि चीन, वियतनाम, थाईलैंड, तुर्की, यूएई, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों पर 12.5% या उससे ज़्यादा की ड्यूटी लगाई गई है।

लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर कम असर

खासकर टेक्सटाइल, गारमेंट, लेदर और फुटवियर जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए यह राहत की बात है। इन सेक्टर्स में भारत के कई बड़े कॉम्पिटिटर्स, जैसे बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मलेशिया पर भी 10% की ही ड्यूटी लागू की गई है। ऐसे में, इन सेक्टर्स में भारतीय एक्सपोर्टर्स अपनी कॉम्पिटिटिव पोजीशन बनाए रखने की उम्मीद कर सकते हैं।

एक्सपोर्टर्स के लिए आगे की रणनीति

FIEO ने भारतीय एक्सपोर्टर्स को सलाह दी है कि वे सिर्फ 10% ड्यूटी के आंकड़े पर ध्यान न दें, बल्कि प्रोडक्ट-स्पेसिफिक (product-specific) एनालिसिस (analysis) करें। कंपनियों को अपने टैरिफ कोड्स की जांच करने, किसी खास प्रोडक्ट के लिए कोई छूट (exclusion) है या नहीं, यह पता लगाने और अपने प्रतिस्पर्धियों द्वारा लगाए जा रहे सटीक टैरिफ से तुलना करने की ज़रूरत है। इससे वे अपनी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी (pricing strategy) को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.