US का बड़ा फैसला: भारतीय एक्सपोर्ट्स को मिली बड़ी राहत, 92% सामान पर इंपोर्ट सरचार्ज खत्म

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
US का बड़ा फैसला: भारतीय एक्सपोर्ट्स को मिली बड़ी राहत, 92% सामान पर इंपोर्ट सरचार्ज खत्म

अमेरिका 24 जुलाई से 10% का इंपोर्ट सरचार्ज (import surcharge) खत्म कर रहा है। इससे भारत के $87.2 बिलियन के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (merchandise exports) का 92% हिस्सा राहत पाएगा। हालांकि, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स को फौरी राहत मिलेगी, पर एक्सपोर्टर्स के लिए अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि सेक्शन 301 (Section 301) के तहत ट्रेड इन्वेस्टिगेशन्स (trade investigations) अभी भी जारी हैं।

Detailed Coverage

भारतीय निर्यातकों को मिलेगी बड़ी राहत

24 जुलाई, 2026 से भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए अच्छी खबर है। अमेरिका अपने अस्थायी 10% सेक्शन 122 इंपोर्ट सरचार्ज (Section 122 import surcharge) को खत्म कर रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिका को होने वाले भारत के सालाना $87.2 बिलियन के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (merchandise exports) का करीब 92% हिस्सा अब वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के तहत स्टैंडर्ड मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) टैरिफ रेट्स (tariff rates) पर लागू होगा।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रेड पॉलिसी (trade policy) में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। फरवरी 2026 से, इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसे कई भारतीय एक्सपोर्ट्स पर यह 10% सरचार्ज लगाया गया था। अब सरचार्ज खत्म होने से इन सेक्टर्स के सामान पर अतिरिक्त टैक्स नहीं लगेगा, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी कीमत (price competitiveness) और बेहतर हो सकती है।

मुख्य एक्सपोर्ट सेक्टर्स पर असर

इस राहत का सबसे ज्यादा फायदा उन प्रोडक्ट्स को होगा जो पहले इस सरचार्ज की मार झेल रहे थे। हालांकि, यह ध्यान रखना अहम है कि सभी एक्सपोर्ट्स को इसका लाभ नहीं मिलेगा। भारत के करीब 8% एक्सपोर्ट्स, जो सेक्शन 232 नेशनल सिक्योरिटी टैरिफ्स (Section 232 national security tariffs) के दायरे में आते हैं, पर कोई बदलाव नहीं होगा। स्टील और एल्यूमीनियम जैसे प्रोडक्ट्स पर पहले की तरह ही भारी ड्यूटी (duty) लगेगी। स्टील पर कुल 52.5% और एल्यूमीनियम पर 55% की ड्यूटी जारी रहेगी, क्योंकि ये अलग कानूनी ढांचे के तहत आते हैं।

भविष्य के ट्रेड रिस्क

सरचार्ज का खत्म होना एक अल्पकालिक राहत जरूर है, लेकिन ट्रेड का माहौल अभी भी नए रेगुलेटरी हर्डल्स (regulatory hurdles) के प्रति संवेदनशील है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, अमेरिका प्रशासन दो सेक्शन 301 इन्वेस्टिगेशन्स (Section 301 investigations) चला रहा है। ये जांचें ग्लोबल सप्लाई चेन्स (supply chains) को लेकर हैं, जिनमें जबरन मजदूरी (forced labor) और अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (excess manufacturing capacity) के आरोप शामिल हैं। भारत इन दोनों जांचों के केंद्र में है। US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (Office of the US Trade Representative) ने पहले ही जबरन मजदूरी की जांच से जुड़ा 12.5% का टैरिफ प्रस्तावित किया है।

इन जांचों के अलावा, सेक्टर लॉन्ग-टर्म पॉलिसी रिस्क (long-term policy risks) का भी सामना कर रहा है। उदाहरण के लिए, भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री (pharmaceutical industry), जो अब तक इन सरचार्ज से काफी हद तक बची रही है, अगस्त 2028 से जेनेरिक मेडिसिन एक्सपोर्ट्स (generic medicine exports) पर नए और उच्च टैरिफ का सामना कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगे निवेशकों और कंपनियों के लिए, मुख्य फोकस जारी सेक्शन 301 जांचों के नतीजों पर रहेगा। नए, लक्षित या सेक्टर-विशिष्ट टैरिफ की संभावना एक ऐसा फैक्टर है जिस पर नजर रखनी होगी। यह उन फायदों को बेअसर कर सकता है जो व्यापक सरचार्ज को हटाने से मिले हैं। मार्केट पार्टिसिपेंट्स (market participants) संभवतः इन जांचों के संबंध में अमेरिकी सरकार की आगामी घोषणाओं पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि यही तय करेगा कि मौजूदा राहत स्थिर ट्रेड टर्म्स (stable trade terms) की ओर स्थायी वापसी है या नए प्रतिबंधों से पहले एक अस्थायी विराम।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.