इकोनॉमी की रफ्तार में आया उछाल
'ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस' (Bureau of Economic Analysis) के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में अमेरिकी इकोनॉमी 2% की वार्षिक दर से बढ़ी है। यह पिछली तिमाही की 0.5% ग्रोथ से काफी बेहतर प्रदर्शन है। ईरान संघर्ष के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह पहली बड़ी तस्वीर है।
टेक और AI इन्वेस्टमेंट का कमाल
कॉर्पोरेट खर्च इस विस्तार का एक बड़ा इंजन रहा। इक्विपमेंट (Equipment) में निवेश 10.4% उछला, जो करीब तीन साल में सबसे तेज रफ्तार है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर और डेटा सेंटर्स में भारी निवेश देखा गया, जिसने इकोनॉमिक ग्रोथ में टेक्नोलॉजी की मजबूत भूमिका को और पुख्ता किया है।
कंज्यूमर खर्च रहा स्थिर
अमेरिकी इकोनॉमी का लगभग 70% हिस्सा बनाने वाले कंज्यूमर खर्च (Consumer Spending) में 1.6% की सालाना बढ़ोतरी हुई। हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी सर्विसेज पर खर्च लगातार बना रहा, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिर सहारा मिलता रहा।
सरकारी खर्च में भी आई तेजी
सरकारी खर्च (Government Spending) ने भी इकोनॉमिक आउटपुट में योगदान दिया। पिछली तिमाही में फेडरल शटडाउन के कारण प्रभावित होने के बाद, Q1 2026 में सरकारी खर्च 4.4% बढ़ा, जिससे कुल प्रदर्शन को और मजबूती मिली।
ट्रेड डेफिसिट ने खींचा ब्रेक
इन सबके बावजूद, ट्रेड (Trade) एक बाधा बनकर उभरा। नेट एक्सपोर्ट्स (Net Exports) ने जीडीपी ग्रोथ को 1.3 प्रतिशत अंक तक कम कर दिया। इसकी मुख्य वजह यह रही कि संभावित ट्रेड पॉलिसी एडजस्टमेंट्स से पहले कंपनियों ने आयात (Imports) में भारी बढ़ोतरी कर दी।
तेल के दाम ने बढ़ाई महंगाई, पर डिमांड मजबूत
डिमांड के एक अहम मापक, रियल फाइनल सेल्स टू प्राइवेट डोमेस्टिक परचेजर्स (Real final sales to private domestic purchasers) में 2.5% (पिछली तिमाही के 1.8% से ऊपर) की वृद्धि देखी गई। हालांकि, महंगाई (Inflation) बढ़ी है। पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स 4.5% (पिछली तिमाही के 2.9% से ऊपर) बढ़ा, जबकि कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) 4.3% पर रहा। तेल की ऊंची कीमतों को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है; हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से सप्लाई की चिंताओं के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $70 प्रति बैरल से बढ़कर $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया।
अनिश्चितता के बीच दिख रही इकोनॉमी की मजबूती
महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद, इकोनॉमी की अंदरूनी मजबूती साफ दिख रही है। अनइंप्लॉयमेंट क्लेम्स (Jobless claims) कई दशकों के निचले स्तर पर आ गए हैं, जो एक टाइट लेबर मार्केट (Labor Market) का संकेत है। मजबूत टेक इन्वेस्टमेंट और लगातार कंज्यूमर खर्च का मेल इकोनॉमिक स्थिरता बनाए हुए है।
