भारत में डिजिटल पेमेंट का बोलबाला लगातार बढ़ता जा रहा है। जनवरी 2026 में, Unified Payments Interface (UPI) ने लेन-देन के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
NPCI के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, जनवरी में UPI के ज़रिए कुल ₹28.33 लाख करोड़ का लेन-देन हुआ। वहीं, लेन-देन की संख्या 21.70 बिलियन को पार कर गई। यह पिछले महीने, यानी दिसंबर 2025 के ₹27.97 लाख करोड़ के आँकड़े से काफी ज़्यादा है। Month-on-month के आधार पर लेन-देन के मूल्य में 21% का उछाल देखा गया। साल-दर-साल (Year-on-year) देखें तो वॉल्यूम में 28% और वैल्यू में 21% की बढ़ोतरी हुई है।
रोजाना औसतन 700 मिलियन से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹91,403 करोड़ रही। Worldline India के CEO रमेश नरसिम्हन ने भी इन रिकॉर्ड-तोड़ आँकड़ों और लगातार जारी ग्रोथ की पुष्टि की।
जहां UPI का इकोसिस्टम फल-फूल रहा है, वहीं पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनी Worldline SA जैसी कंपनियां इस बदलते बाज़ार में काम कर रही हैं। जनवरी 2026 तक, Worldline SA का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब $0.55 बिलियन USD था और इसका P/E रेश्यो -0.09 था। कंपनी के शेयर में हाल के दिनों में कमजोरी देखी गई है, जो ब्रॉडर मार्केट से पीछे चल रहा है।
UPI अब भारत की डिजिटल इकोनॉमी की रीढ़ बन गया है, जिसके 2026 तक $10 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। यह ग्रोथ मोबाइल वॉलेट, QR कोड पेमेंट और कॉन्टैक्टलेस टेक्नोलॉजी को अपनाने से तेज़ हुई है। PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे प्रमुख UPI ऐप अभी भी वॉल्यूम में राज कर रहे हैं। NPCI सिर्फ पेमेंट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रहा है।
आगे चलकर, UPI वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ाएगा और क्रेडिट तक पहुँच आसान बनाएगा। UPI Multi-Signatory और माइक्रो ATM के ज़रिए कैश निकालने जैसी नई सुविधाएँ भी जल्द आ सकती हैं।