GDP से आगे, खुशहाली और स्थिरता पर फोकस
'Counting What Counts: A Compass of Progress for People and Planet' नाम की इस रिपोर्ट में UN के विशेषज्ञों का कहना है कि GDP सिर्फ आर्थिक गतिविधि का एक पैमाना है। यह असल में इंसानी खुशहाली, सामाजिक मजबूती या पर्यावरण की सेहत को ठीक से नहीं दिखाता। आज के दौर में जहां असमानता, पर्यावरण को नुकसान और संस्थाओं पर गिरता भरोसा बड़ी समस्याएं हैं, वहीं GDP ग्रोथ अक्सर इन मुद्दों को नजरअंदाज करती है।
31 संकेतकों वाला नया फ्रेमवर्क
UN सदस्य देशों के अनुरोध पर आई इस रिपोर्ट का मुख्य मकसद 'समान, समावेशी और टिकाऊ खुशहाली' (equitable, inclusive, and sustainable well-being) को परिभाषित करना है। इसके लिए 31 संकेतकों का एक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जो सामाजिक, आर्थिक, संस्थागत और पर्यावरणीय क्षेत्रों को कवर करता है। यह तरीका देश की सेहत का एक व्यापक चित्र पेश करता है, जो सिर्फ आर्थिक उत्पादन से आगे जाता है।
निवेशकों का ESG की ओर झुकाव
यह बदलाव सीधे तौर पर निवेशकों के लिए है। जैसे-जैसे दुनिया GDP से आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे Environmental, Social, and Governance (ESG) यानी पर्यावरण, सामाजिक और शासन कारकों पर ध्यान बढ़ रहा है। सस्टेनेबल (sustainable) निवेश की मांग तेजी से बढ़ रही है, और 2025 की शुरुआत में ऐसे फंड्स ने पारंपरिक फंड्स को 12.5% के मुकाबले 9.2% का औसत रिटर्न देकर पीछे छोड़ दिया। 2018 से अब तक, सस्टेनेबल फंड में $100 का निवेश $154 हो गया, जबकि पारंपरिक फंड में यह $145 रहा।
नई राह में चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, GDP से आगे बढ़ने में कई चुनौतियां और जोखिम भी हैं। जो कंपनियां पारंपरिक आर्थिक विकास पर ही टिकी हैं, उन्हें अपनी रिपोर्टिंग और रणनीति बदलनी पड़ सकती है। AI (Artificial Intelligence) जैसी नई टेक्नोलॉजी जहां प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकती है, वहीं नौकरियों के नुकसान और पावर कंसंट्रेशन जैसे जोखिम भी लाती है, जिन्हें GDP मापता नहीं। ESG रिपोर्टिंग में भी कॉमन स्टैंडर्ड तय करना और 'ग्रीनवॉशिंग' (greenwashing) से बचना एक बड़ी चुनौती है।
भविष्य का रास्ता: निवेश और कॉर्पोरेट वैल्यू का नया पैमाना
भविष्य में, कॉर्पोरेट वैल्यूएशन और निवेश की रणनीतियां GDP से आगे बढ़कर ही तय होंगी। एनालिस्ट (analysts) और निवेशक ESG डेटा को जोखिम मूल्यांकन और पूंजी आवंटन में अहम मान रहे हैं। UN की यह रिपोर्ट नीति निर्माण और कॉर्पोरेट रिपोर्टिंग में इन व्यापक मापदंडों के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी। जो कंपनियां स्थिरता, निष्पक्षता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाएंगी, उनकी वैल्यूएशन बढ़ेगी और उन्हें ज्यादा निवेश मिलेगा।
