AI कैसे बदल रहा है UK की नौकरियां?
पूर्व यूके प्राइम मिनिस्टर ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने इस बड़े बदलाव पर गौर फरमाया है। उन्होंने कहा है कि AI की वजह से कंपनियाँ अब बिना ज़्यादा कर्मचारी रखे अपनी आउटपुट बढ़ा सकती हैं। यह ट्रेंड खासकर लॉ (Law), अकाउंटेंसी (Accountancy) और क्रिएटिव फील्ड्स (Creative Fields) जैसे सेक्टर्स में ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहाँ पहले एंट्री-लेवल (Entry-level) यानी शुरुआती स्तर की नौकरियों पर बड़ी संख्या में जूनियर स्टाफ को हायर किया जाता था। AI का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में कुल एम्प्लॉयमेंट (Employment) में 5% की गिरावट देखी गई है, जबकि जूनियर रोल्स (Junior Roles) में यह गिरावट 5.8% तक रही है। इसका मतलब है कि कंपनियों में सीनियर पोजीशंस (Senior Positions) ज्यादा केंद्रित हो रही हैं, जिससे नए प्रोफेशनल्स के लिए अनुभव हासिल करना मुश्किल हो रहा है।
AI का बूस्ट और इकोनॉमिक चैलेंज
AI सेक्टर में तेजी से ग्रोथ देखने को मिल रही है। OpenAI, जिसका वैल्यूएशन अप्रैल 2026 में एक बड़े फंडिंग राउंड (Funding Round) के बाद $852 अरब हो गया था (इससे पहले $122 अरब का राउंड हुआ था), और Anthropic, जिसका वैल्यूएशन $380 अरब है ( $30 अरब की फंडिंग के बाद), AI की ताकत का सबूत हैं। वहीं, टेक दिग्गज Microsoft और Alphabet (Google) के मार्केट कैप (Market Cap) क्रमशः $3.19 ट्रिलियन और $4.20 ट्रिलियन हैं, जिनके P/E रेश्यो (P/E Ratios) लगभग 26-31 के आसपास हैं। यूके का अपना AI सेक्टर 3,800+ कंपनियों और 5,00,000 से ज्यादा स्पेशलिस्ट्स (Specialists) को सपोर्ट करता है, जिसमें सरकार के सॉवरेन AI प्रोग्राम (Sovereign AI Program) जैसे प्रयास भी शामिल हैं।
लेकिन, बड़ी आर्थिक चुनौती प्रोडक्टिविटी (Productivity) में बढ़ोतरी और जॉब ग्रोथ (Job Growth) के बीच का फासला है। AI को अपनाने से यूके का जॉब मार्केट (Job Market) कमजोर होता दिख रहा है, जहाँ अनएम्प्लॉयमेंट (Unemployment) 5.2% पर पहुँच गया है, जो कि पेंडेमिक (Pandemic) के बाद सबसे ज़्यादा है। साथ ही, वेज ग्रोथ (Wage Growth) यानी वेतन वृद्धि भी धीमी रही है। जहाँ AI से प्रोडक्टिविटी सालाना 0.4-1.2 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है, वहीं यह बढ़त नौकरियों में तब्दील नहीं हो रही। इससे एक बड़ी टैक्स प्रॉब्लम (Tax Problem) खड़ी हो गई है: नेशनल इंश्योरेंस (National Insurance) कॉन्ट्रिब्यूशन जैसे रोज़गार पर आधारित टैक्स से होने वाली कमाई गिर सकती है, जबकि AI से होने वाला प्रॉफिट बढ़ेगा लेकिन उस पर कम टैक्स लगेगा।
बढ़ती असमानता और भविष्य की राह
AI को इंटीग्रेट (Integrate) करने के मौजूदा तरीके में बढ़ती आर्थिक असमानता (Economic Inequality) और एंट्री-लेवल जॉब्स (Entry-level jobs) के कम विकल्प जैसे गंभीर खतरे हैं। ऑटोमेशन (Automation) पर फोकस, कर्मचारियों की मदद करने के बजाय, शुरुआती करियर वाले कर्मचारियों और आसानी से ऑटोमेट होने वाली भूमिकाओं में काम करने वालों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचा रहा है। इससे एक टू-टियर जॉब मार्केट (Two-tier job market) बन सकता है, जहाँ AI-फ्रेंडली स्पेशलाइज्ड स्किल्स (Specialized Skills) वाले लोग अच्छा करेंगे, जबकि जूनियर रोल्स (Junior Roles) सिकुड़ जाएंगे। कंपनियाँ स्टाफ को बनाए रखने के बजाय ऑटोमेशन पर टैक्स ब्रेक (Tax Break) का फायदा उठा सकती हैं, जिससे इन्वेस्टमेंट (Investment) का पैटर्न बिगड़ सकता है और इनकम गैप्स (Income Gaps) बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, AI की रफ़्तार सरकारी नीतियों से कहीं ज़्यादा तेज़ है, और पुरानी पॉलिसीज़ (Policies) पर निर्भर रहने से निष्पक्ष विकास (Fair Growth) को नुकसान पहुँच सकता है।
टैक्स रिफॉर्म और नए स्किल्स की ज़रूरत
इस बदलते इकोनॉमी (Economy) को संभालने के लिए, एक स्ट्रैटेजिक टैक्स सिस्टम रिफॉर्म (Tax System Reform) बेहद ज़रूरी हो गया है। नेशनल इंश्योरेंस (National Insurance) कॉन्ट्रिब्यूशन को फेज़ आउट (Phase out) करके कॉर्पोरेट प्रॉफिट (Corporate Profit) पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव एक रास्ता दिखाता है। यह AI-ड्रिवेन प्रोडक्टिविटी से उत्पन्न संपत्ति को कैप्चर (Capture) कर सकेगा और रोज़गार की लागत कम करके कंपनियों को स्टाफ बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। टैक्स के अलावा, 'स्किल्स फॉर लाइफ' (Skills for Life) यानी सामान्य, एनालिटिकल (Analytical) और क्रिएटिव एबिलिटीज (Creative Abilities) जैसे कौशल विकसित करने की ज़रूरत बढ़ रही है, जो AI के साथ मिलकर काम कर सकें। यूनिवर्सिटीज़ (Universities) और कॉलेजों को क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking) और क्रिएटिविटी (Creativity) को बढ़ावा देने के लिए अपने कोर्स अपडेट करने होंगे। यूके को ग्लोबल AI लीडर (Global AI Leader) बने रहने के लिए, उसे स्मार्ट नीतियों और लोगों में इन्वेस्टमेंट के ज़रिए AI के सोशल और इकोनॉमिक इम्पैक्ट्स (Social and Economic Impacts) को इनोवेट (Innovate) और सावधानी से मैनेज (Manage) करना होगा।
